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    गुर्जर प्रतिहार राजवंश | 1

    गुर्जर प्रतिहार राजवंश

    हेलो दोस्तों आपका INDIA TODAY ONE blog में स्वागत है। आज इस लेख मे हम गुर्जर प्रतिहार राजवंश के बारे में जानेंगे। राजपूतों की उत्पत्ति के सन्दर्भ में भिन्न-भिन्न मत प्रचलित हैं। कुछ इन्हें विदेशियों की सन्तान मानते हैं तथा कुछ विद्वान इन्हें भारत में रहने वाली एक जाति मानते हैं। विदेशी उत्पत्ति के मतों में कर्नल जेम्स टाड, तथा विलियम क्रुक, स्मिथ प्रमुख विद्वान है। टाड के अनुसार राजपूत सीथियन की संतान थे। क्रुक के अनुसार विदेशी जातियों के धर्म शुद्धीकरण से राजपूतों का उदय हुआ। वहीं स्मिथ के अनुसार इनकी उत्पत्ति शकों तथा हुणों से हुई।

    राजपूतों की भारतीय उत्पत्ति के सिद्धान्तकार गौरीशंकर ओझा, हीराचन्द्र ओझा इत्यादि विद्वान हैं। इन्होंने राजपूतों को प्राचीन क्षत्रियो का ही वंशज बताया है। वहीं दशरथशर्मा तथा विशम्भर शरण पाठक इन्हें ब्राह्मणों से उत्पन्न मानते हैं।

    राजपूतों की उत्पत्ति के बारे में मान्य मत है कि इनकी उत्पत्ति भारतीय समाज की विविध जातियों तथा जनजातियों के साथ उन विदेशी आक्रमणकारी जातियों से भी हुई है जो भारतीय परंपरा में रच बस गये। उदाहरण के लिए बनाफर राजपूतों को वनस्फर तथा तोमर राजपूतों का हूण तोरमाण से जोड़ा जाता है।

    कुछ विद्वान राजपूतों को आबू पर्वत पर वशिष्ठ के अग्निकुण्ड से उत्पन्न हुआ मानते हैं। यह सिद्धांत चन्दरवरदाई के पृथ्वीराज रासो पर आधारित है तथा प्रतिहार, चालुक्य, चौहान और परमार राजपूतों का जन्म इससे माना जाता है।

    प्रमुख राजपूत राजवंशो में है- मालवा के परमार, कन्नौज के गहड़वाल, अजमेर के चौहान, जेजाकभुक्ति के चंदेल, दिल्ली के तोमर तथा जबलपुर के कलचूरि।

    गुर्जर प्रतिहार राजवंश

    गुर्जर प्रतिहार राजवंश

    • अग्निकुल के राजपूतों में सर्वाधिक प्रसिद्ध गुर्जर प्रतिहार राजवंश था जो गुर्जरी शाखा से सम्बन्धित होने के कारण इतिहास में गुर्जर-प्रतिहार कहा जाता था।
    • पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख में गुर्जर जाति का उल्लेख सर्वप्रथम हुआ है।
    • प्रतिहार अभिलेखो में इस वंश के शासकों नें स्वयं को लक्ष्मण का वंशज बताया ।
    • संस्थापक :- हरिश्चन्द्र
    •  प्रथम वास्तविक संस्थापक :- नागभट्ट प्रथम
    •  राजधानी :- उज्जैन

    गुर्जर प्रतिहार राजवंश

    गुर्जर-प्रतिहार वंश के शासक

    • नागभट्ट प्रथम (730 – 756 ई.)
    • वत्सराज (783 – 795 ई.)
    • नागभट्ट द्वितीय (795 – 833 ई.)
    • मिहिरभोज (भोज प्रथम) (836 – 889 ई.)
    • महेन्द्र पाल (890 – 910 ई.)
    • महिपाल (914 – 944 ई.)
    • भोज द्वितीय
    • विनायकपाल
    • महेन्द्रपाल द्वितीय
    • देवपाल (940 – 955 ई.)
    • महिपाल द्वितीय
    • विजयपाल
    • राज्यपाल
    • यशपाल

    इन में से हम कुछ प्रमुख शासकों के बारे में जानेंगे।

    गुर्जर प्रतिहार राजवंश

    (1.) नागभट्ट प्रथम (730 – 756 ई.)

    •  ग्वालियर अभिलेख के अनुसार इसने अरबी को सिंध से आगे नहीं बढ़ने दिया ग्वालियर प्रशस्ति में उसे मलेच्छो का नाशक’ बताया गया तथा नरायण का अवतार कहा गया है।

    (2.) वत्सराज (783 – 795 ई.)

    •  वत्सराज के समय से ही कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष शुरू हुआ।

    (3.) नागभट्ट द्वितीय (795 – 833 ई.)

    •  नागभट्ट द्वितीय ने कन्नौज पर अधिकार करके उसे प्रतिहार साम्राज्य की राजधानी बनाया।

    (4.) मिहिरभोज (भोज प्रथम) (836 – 889 ई.)

    •  यह वैष्णव धर्म का अनुयायी था इसने आदिवराह तथा प्रभास जैसी उपाधियां धारण की।
    •  मिहिर भोज नें द्रम्भ नामक चांदी का सिक्का भी चलवाया।
    •  अरब यात्री सुलेमान इसके शासनकाल में भारत आया था।
    •  अरब यात्री सुलेमान के विवरण के अनुसार मिहिरभोज के पास अपार सैनिक सम्पत्ति थी ” सुलेमान इसे अरबों (इस्लाम) का सबसे बड़ा शत्रु बताता है                                              

    गुर्जर प्रतिहार राजवंश

    (5.) महेन्द्र पाल प्रथम (890 – 910 ई.)

    •  इसकी राजसभा में प्रसिद्ध विद्वान राजशेखर निवास करते थे जो महेन्द्रपाल के राजकवि तथा राजगुरु थे।
    •  राजशेखर की रचना  बाल रामायण, विद्वशाल भंजिका, कर्पूरमंजरी, – काव्यमीमांसा, हरिविलास, भुवनकोश
    •  राजशेखर को महेन्द्रपाल ने निर्भयराज, निर्भय नरेन्द्र, रघुकुल चुणामणि कहा है।                                                

    (6.) महीपाल प्रथम (क्षितिपाल)

    •  महीपाल प्रथम (क्षितिपाल) के समय मे बगदाद निवासी अलमसूदी (915-916) गुजरात आया था।
    •  इसने गुर्जर-प्रतिहार को ‘अलगुजर तथा राजा को ‘बौरा’ कहकर पुकारा।
    •  राजशेखर उसे ‘आर्यावर्त’ का ‘महाराजाधिराज कहता है।
    •  अलमसूदी ने भारतीय मौसम / मानसून का वर्णन किया                                         

    (7.) विजयपाल

    •  विजयपाल के समय प्रतिहार साम्राज्य बंट गया और नए राजवंशो का उदय हुआ।
    1. कन्नौज के गहड़वाल
    2. जेजाकभुक्ति के चंदेल
    3. गुजरात के चालुक्य (सोलंकी)
    4. मालवा के परमार
    5. शाकम्भरी (अजमेर) के चौहान
    •  इनमें चौहान, चालुक्य, परमार शक्तिशाली उत्तराधिकारी बनें।                                                                  

    (8.) राज्यपाल

    •  इसके समय में 1018 ई. में महमूद गजनवी ने कन्नौज पर आक्रमण किया जिसमें राज्यपाल बिना लड़े भाग गया
    •  राज्यपाल का पुत्र त्रिलोचनपाल भी 1019 ई० में गजनवी से पराजित हुआ। इसके उपरान्त प्रतिहारों का अंत हो गया।
    •  ह्वेनसांग ने गुर्जर राज्य को पश्चिमी भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य कहा।
    •  गुर्जर-प्रतिहार ने विदेशियों के आक्रमण के समय भारत के द्वारपाल की भूमिका निभाई।
    •  इस वंश का अंतिम शासक यशपाल (1036 ई०) था।

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    FAQ

    Ques 1. गुर्जर प्रतिहार राजवंश के राजा कौन थे?

    Ans.       गुर्जर-प्रतिहार वंश के शासक

      • नागभट्ट प्रथम (730 – 756 ई.)
      • वत्सराज (783 – 795 ई.)
      • नागभट्ट द्वितीय (795 – 833 ई.)
      • मिहिरभोज (भोज प्रथम) (836 – 889 ई.)
      • महेन्द्र पाल (890 – 910 ई.)
      • महिपाल (914 – 944 ई.)
      • भोज द्वितीय
      • विनायकपाल
      • महेन्द्रपाल द्वितीय
      • देवपाल (940 – 955 ई.)
      • महिपाल द्वितीय
      • विजयपाल
      • राज्यपाल
      • यशपाल

    Ques 2. गुर्जर प्रतिहार वंश का पहला राजा कौन था?

    Ans. गुर्जर प्रतिहार राजवंश संस्थापक :- हरिश्चन्द्र

    गुर्जर प्रतिहार राजवंश प्रथम वास्तविक संस्थापक :- नागभट्ट प्रथम

     

     

    गुर्जर प्रतिहार राजवंश

    गुर्जर प्रतिहार राजवंश

    ASHWANI SIHAG

     

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