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    बौद्ध धर्म का इतिहास | 1

    बौद्ध धर्म

    हेलो दोस्तों आपका INDIA TODAY ONE blog में स्वागत है। इस लेख हम बौद्ध धर्म के बारे में जानेंगे। अगर आप नहीं जानते तो मैं आपको बता दूं कि बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध थे। इनके बारे में आज हम इस में चर्चा करेंगे कि महात्मा बुद्ध का जन्म कहां और कब हुआ और कैसे उन्होंने बौद्ध धर्म की स्थापना की और किन कारणों से बौद्ध धर्म इतना अधिक प्रचलित हुआ और वह कौन से कारण थे। जिनके कारण बौद्ध धर्म अपनी जन्मभूमि यानी भारत से चला गया अर्थात् भारत में बौद्ध धर्म को मानने वाले बहुत ही कम रह गये।

    बौद्ध धर्म

    • बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध है। जिनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था।

    बौद्ध धर्म

    महात्मा बुद्ध का जीवन परिचय।

    जन्म[563 ई. पू.] लुंबिनी (नेपाल)
    ध्यान स्थलबोधगया ( पीपल के  वृक्ष के नीचे)
    पहला प्रवचनवाराणसी निकट सारनाथ में।
    मृत्युकाशीनगर (कुशीनगर), आयु 80 वर्ष में।
    पिताशुद्धोधन (निर्वाचित राजा और गणतांत्रिक शक्यो  के प्रधान थे)
    माता महादेवी अर्थात महामाया।
    पालन पोषणमौसी प्रजापति गौतमी ने।
    पत्नीयशोधरा  (शाक्य कुल की कन्या ) 
    पुत्र राहुल।
    घोड़ाकंथक ।  (सारथी:- चाण )
    विवाह16 वर्ष की आयु में
    • गौतम बुद्ध के जीवन संबंधित चार दृश्य अत्यंत प्रसिद्ध है। जिन्हें देखकर उनके मन में वैराग्य की भावना उठी।
    • वृद्ध व्यक्ति।
    • बीमार व्यक्ति।
    • मृत व्यक्ति।
    • सन्यासी ( प्रसन्न मुद्रा में)।
    • सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की अवस्था में सांसारिक समस्याओं से व्यथित होकर गृह त्याग दिया इसको बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण कहा गया।
    • बुद्ध सर्वप्रथम अनुप्रिया नामक आम्र उद्यान में कुछ दिन रुके वैशाली के समीप उनकी मुलाकात सांख्य दर्शन के दर्शनिक आचार्य अलार कलाम तथा राजगृह के समीप धर्माचार्य रूद्रक रामपुत्र से हुई । यह दोनों बुद्ध के प्रारंभिक गुरु थे।
    • 6 वर्ष तक अथक परिश्रम एवं घोर तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख पूर्णिमा की एक रात पिंपल (बोधि वृक्ष) के नीचे  निरंजना (पुनपुन) नदी के तट पर सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ। इसी दिन से वें तथागत होगे।
    • ज्ञान की प्राप्ति के बाद गौतम  “बुद्ध” के नाम से प्रसिद्ध हुए।
    • लगातार 40 वर्ष तक गौतम बुद्ध के द्वारा बौद्ध धर्म का प्रचार किया गया बुद्ध केवल वर्षा काल में ही एक स्थान पर रहते थे।
    • बुद्ध की मृत्यु (महापरिनिर्वाण) 80 वर्ष की आयु में 443 ई.पू. कुशीनगर देवरिया जिला उत्तर प्रदेश में हुआ।
    • पुरातत्व  साक्ष्य के आधार पर इनका काल छठी सदी ईसा पूर्व में रहा होगा।

    बुद्ध धर्म के सिद्धांत अर्थात महात्मा बुद्ध के उपदेश एवं शिक्षा।

    • बुद्ध बड़े व्यवहारिक सुधारक थे। वह उन  निरर्थक वाद – विवादों में नहीं फंसे जो उनके समय में आत्मा और परमात्मा के बारे में जोरों से चल रहे थे। उन्होंने अपने को सांसारिक समस्याओं में लगाया।
    • उन्होंने कहा कि संसार दुख में है। और लोग केवल कामना (इच्छा, लालसा) के कारण दुख पाते हैं। यदि कामना अर्थात् लालसा पर विजय पाई जाए तो निर्वाण प्राप्त हो जाएगा जिसका अर्थ है। कि जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाएगी।

    1. अष्टांगिक मार्ग

    बौद्ध धर्म

    • गौतम बुद्ध ने दुख की निवृत्ति के लिए अष्टांगिक मार्ग बताया :-
    1.सम्यक् दृष्टिवस्तु के वास्तविक स्वरूप की समझ।
    2.सम्यक् संकल्पलाभ, द्वेष वह हिंसा से मुक्त विचार।
    3.सम्यक् वाक्अप्रिय वचनों का त्याग।
    4.सम्यक्  कर्माकसत्कर्म का अनुसरण।
    5.सम्यक् आजीवसदाचार युक्त आजीविका।
    6.सम्यक् व्यायाममानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य।
    7.सम्यक् स्मृतिसात्विक भाव।
    8.सम्यक् समाधिएकाग्रता।

    [ उनकी शिक्षा है। कि न अत्यधिक विलास करना चाहिए ने अत्यधिक संयम व मध्यम मार्ग के प्रशंसक थे।]

    2. जैन तीर्थंकरों की तरह बुद्ध ने अपने अनुयायियों के लिए नियम (विनय) निर्धारित किए।

    बौद्ध धर्म

    यह पांच प्रकार के हैं।

    1. पराए धन का लोभ नहीं करना।
    2. हिंसा नहीं करना।
    3. नशे का सेवन नहीं करना।
    4. झूठ नहीं बोलना।
    5. दुराचार से दूर रहना।

    3. बौद्ध धर्म के त्रिरत्न

    बौद्ध धर्म

    1. बुद्ध।

    • बुद्ध का अर्थ तार्किक ज्ञान से है अर्थात् जागृत मनुष्य या अनंत ज्ञानी मनुष्य जिसने खुद के प्रयासों से बुद्धत्व या ज्ञान प्राप्त किया है।

    2. धम्म।

    • धम्म का अर्थ शिक्षा व आचार संहिता से है अर्थात् बौद्ध धर्म की शिक्षाओ को धम्म कहा गया है सम्पूर्ण बौद्ध धर्म “धम्म” पर आधारित है। और साथ ही इसमें बौद्ध धर्म संबंधित नियम भी करते है।

    3. संघ।

    •  संघ अर्थात् संघटन बौद्ध भिझु व बौद्ध उपासक दोनों इसमें शामिल है।

    4. बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य

    बौद्ध धर्म

    1. दुख।

    • दुःख प्रथम आर्यसत्य यह संसार दुःखमय है। यह संसार दुःख से पूर्ण है जन्म, जरा बीमारी एवं मृत्यु अप्रिय का संयोग एवं प्रिय का वियोग दुःख है।

    2. दुख समुदाय।

    • दुःख समुदाय दुसरा आर्यसत्य इन दुःखों का कारण है, इन समस्त दुःखों की उत्पत्ति किन्हीं कारणों से होती है। इच्छा अभिलाषा, लालसा, बौद्ध की भाषा में तृष्णा ही समस्त दुःखो कारण है। तृष्णा से ही समस्त दुःखों की उत्पत्ति होती है।

    3. दुख निरोध (निर्वाण)।

    • दुःख निरोध (निर्वाण) तीसरा आर्यसत्य इन दुःखों का निरोध किया जा सकता है। कारण के नष्ट कर देने से कार्य स्वतः नष्ट हो जाता है। इन दुःखों का कारण इच्छा, अभिलाषा, लालसा या तृष्णा है। इनका त्याग कर देने से दुःख समाप्त हो जाते हैं।

    4. दुख निरोधगामिनी प्रतिपदा।

    • दुःख निरोग मार्ग चौथा आर्यसत्य दुःखों को त्याग करने का मार्ग है। इस मार्ग को आर्य अष्टािंगिक मार्ग कहते हैं।

    बौद्ध धर्म की विलक्षणताए और इनके प्रसार के कारण।

    • बौद्ध धर्म ईश्वर और आत्मा को नहीं मानता है।
    • बौद्ध धर्म शुरू में दार्शनिक वाद-विवादों के जंजाल में फंसा नहीं इसलिए यह सामान्य लोगों को भाया।
    • यह विशेष रूप से निम्न वर्णों का समर्थक पास सका क्योंकि इसमें वर्ण व्यवस्था की निंदा की गई है।
    • संघ में प्रवेश का अधिकार स्त्रियों को भी था। जिससे उन्हें पुरुष के बराबरी प्राप्त होती  थी।
    • ब्राह्मण धर्म की तुलना में बौद्ध धर्म अधिक  उदार  और अधिक जनतांत्रिक था।
    • मगध के निवासी इस धर्म की ओर तुरंत उन्मुख हुए क्योंकि कट्टर ब्राह्मण उन्होंने नीच मानते थे।
    • उत्तर बिहार के लोग गंगा की दक्षिण मगध में मरना पसंद नहीं करते थे।

    “कहा जाता है। कि एक बार एक अज्ञानी व्यक्ति ने उन्हें गालियां दी वह चुपचाप सुनते रहे उस व्यक्ति का गाली देना बंद हुआ तो उन्होंने पूछा वत्स कोई दान को स्वीकार नहीं करे तो उस दान का क्या होगा विरोधी ने उत्तर दिया वह देने वाले के पास रह जाएगा तब बुद्ध ने कहा वत्स मैं तुम्हारी गालियां लेना स्वीकार नहीं करता।”

    • जनसाधारण की भाषा पाली को अपनाने से भी बौद्ध धर्म के प्रचार में बल मिला।
    • बुद्ध के निर्वाण के दो साल बाद प्रसिद्ध मौर्य सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म ग्रहण किया।
    • अशोक ने अपने धर्मदूतों के द्वारा इस धर्म को मध्य एशिया, पश्चिमी एशिया और श्रीलंका में फैलाया और इससे विश्व धर्म का रूप दिया।
    • अपनी जन्मभूमि से तो यह धर्म विलुप्त हो गया परंतु दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया के देशों में जीता जागता है।

    बौद्ध धर्म के ह्रास के कारण

    • ईशा की 12 वीं सदी आते – आते हैं बौद्ध धर्म भारत के विलुप्त हो गया।
    • हम देखते हैं। कि भारत में हर धर्म सुधार की भावना से प्रेरित होता है। परंतु कालक्रम में वह उन्हीं कर्मकांड और अनुष्ठानों के जाल में फंस जाता है। जिसकी आरंभ में वह निंदा करता था। बौद्ध धर्म में भी परिवर्तन का ऐसा ही चक्कर चला।
    • इसमें भी ब्राह्मण धर्म की वे बुराइयां  घुस गई जिसके विरुद्ध  इसने आरंभ में लड़ाई छेड़ी थी।
    • बौद्ध धर्म की चुनौती का  मुकाबला करने के लिए ब्राह्मणों ने अपने धर्म को सुधारा।
    • दूसरी और बौद्ध धर्म में विकृतियां आती गई धीरे-धीरे बौद्ध भिक्षु जनजीवन की मुख्यधारा में बटते  गए।
    • उन्होंने जनसामान्य की भाषा पाली को छोड़ दिया और संस्कृत को ग्रहण कर लिया जो केवल विद्वानों की भाषा थी।
    • सातवीं सदी के आते-आते बौद्ध विहार विलासी लोगों के प्रभुत्व में आ गय और उन कुकर्मों केंद्र बन गए जिनका गौतम बुद्ध ने कड़ाई के साथ निषेध किया था।
    • विहारो में अपार संपत्ति और स्त्रियों के प्रवेश करने से उनकी स्थिति और भी बिगड़ी बौद्ध भिक्षु नारियों को भोग की वस्तु समझने लगे।
    • कहां जाता है कि एक समय बुद्ध ने अपने प्रिय शिष्य आनंद से कहा था “यदि विहारो में स्त्रियों का प्रवेश ना हुआ होता तो यह धर्म हजारों वर्षों तक टिकाता  लेकिन जब से स्त्रियों को प्रवेशाधिकार दे दिए गए तो यह धर्म केवल 500 वर्ष तक टिकेगा”।
    • शैव संप्रदाय के राजा मिहिरकुल  ने सैकड़ों बोद्धों को मौत के घाट उतारा।
    • गोंड देश के शिवभक्त शासक ने बोधगया में उस बौद्धिक वृक्ष को काट डाला जिसके नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।
    • हुआन शासक ने लिखा है कि 1600 स्तुप व  विहार  तोड़ डाले गए।
    • तुर्को न विहार में अनेक बौद्ध भिक्षुओं का सहार किया।

    बौद्ध धर्म का प्रभाव

    • बुद्ध के अनुसार दरिद्रता, घृणा, क्रूरता ही हिंसा की जननी है । बुद्ध ने कहा है कि किसानों को उन्नत बीज, व्यापारियों को धन और श्रमिकों को उनका उनकी मजदूरी मिलना ही उचित मानवता है।
    • भिक्षुओं के आचरण के नियम से ईसा पूर्व छठी और पाँचवी सदी वाले पूर्वोत्तर भारत की भौतिक स्थिति की झलक दिखाई देती है।
    • ईसा पूर्व पांचवी सदी में विकसित मुद्रा के प्रचलन निजी संपत्ति और विलास पूर्ण जीवन के विरुद्ध आंशिक विद्रोह की झलक भी देखने को मिलती है।
    • परिवार पालन, निजी संपत्ति की रक्षा करना, राजा का आदर करना दोनों ही धर्म में प्रमुख रहा।
    • बौद्ध धर्म का लक्ष्य मानव को मुक्ति एवं निर्वाण का मार्ग दिखाना था।
    • शूद्रों तथा स्त्रियों के लिए प्रवेश बौद्ध संघ में खुला रखा था। जिससे बौद्ध धर्म ने समाज में गहरा प्रभाव जमाया।
    • बौद्ध धर्म में अहिंसा और जीव मात्र के प्रति दया की भावना जगा कर पशु बलि पर रोक लगाई।
    • भारत में पूजित पहली प्रतिमा मानव की शायद बुद्ध की ही रही होगी।
    • बिहार के गया, मध्यप्रदेश के सांची स्तूप, और भरहुत में जो चित्रफलक (पैनल) मिले है बौद्ध कला के उत्कृष्ट नमूने हैं।
    • ईसा की पहली सदी में बुद्ध की फलक प्रतिमाएं बनने लगी थी।
    • भारत के पश्चिमोत्तर सीमांत के यूनान एवं भारत के मूर्तिकारों ने नए ढंग की कला की सृष्टि की जो परिणामत: गांधार कला कहलाने लगी।

    बौद्ध संगीतियां

    प्रथम बौद्ध संगीति

    स्थानराजगृह
    शासक अजातशत्रु
    अध्यक्ष महाकश्यप
    कार्य
    • इसमें सूत्र पिटक का संकलन आनंद भी किया।
    • विनयपिटक का संकलन उपाली ने किया।

    द्वितीय बौद्ध संगीति

    स्थानवैशाली
    शासककालाशोक
    अध्यक्षसबकामीर स्थविरयस
    कार्यइसमें बौद्ध अनुयाई दो गुटों में बंट गए।

    • स्थविरवादी– यह घूम- घूम का धर्म प्रचार पर बल देते थे।
    • महासांधिक– यह मठ में रहकर धर्म प्रचार पर बल देते थे

    तृतीय बौद्ध संगीति

    स्थान पाटलिपुत्र।
    शासकअशोक।
    अध्यक्षमोगलीपुत्र तिस्स।
    कार्य
    • अभिधम्मपिटक नाम क ग्रंथ का संकलन मोगलीपुत्र तिस्स ने किया।
    • अशोक ने संघ में फूट डालने वालों को चेतावनी दी।

    चतुर्थ बौद्ध संगीति

    स्थानकश्मीर (कुंडलवन)।
    शासककनिष्क
    अध्यक्षअध्यक्ष- वसुमित्र, उपाध्यक्ष- अश्वघोष
    कार्यइस बैठक में बौद्ध धर्म दो संप्रदायों में बंट गया।

    • हीनयान
    • महायान अर्थात महायान धर्म का उदय हुआ।

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    FAQ

    Ques 1. बौद्ध धर्म के संस्थापक कौन थे?

    Ans. बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध है। जिनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था।

    Ques 2. बौद्ध धर्म का इतिहास?

    Ans. बौद्ध धर्म का इतिहास बहुत पुराना है। बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध है। जिनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। जिनका जन्म [563 ई. पू.] लुंबिनी (नेपाल)।

    Ques 3. बौद्ध धर्म क्या है?

    Ans. बौद्ध धर्म हिंदू धर्म, जैन धर्म, ईसाई धर्म आदी धर्मों की तरह ही एक प्रकार का धर्म है। बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध है। जिनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। जिनका जन्म [563 ई. पू.] लुंबिनी (नेपाल)।

    Ques 4. बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य क्या है?

    Ans. बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य :-

    1. दुख।
    2. दुख समुदाय।
    3. दुख निरोध।
    4. दुख निरोधगामिनी प्रतिपदा।

    Ques 5. बौद्ध धर्म में कितने आर्य सत्य का वर्णन है?

    Ans. बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य है।

    1. दुख।

    • दुःख प्रथम आर्यसत्य यह संसार दुःखमय है। यह संसार दुःख से पूर्ण है जन्म, जरा बीमारी एवं मृत्यु अप्रिय का संयोग एवं प्रिय का वियोग दुःख है।

    2. दुख समुदाय।

    • दुःख समुदाय दुसरा आर्यसत्य इन दुःखों का कारण है, इन समस्त दुःखों की उत्पत्ति किन्हीं कारणों से होती है। इच्छा अभिलाषा, लालसा, बौद्ध की भाषा में तृष्णा ही समस्त दुःखो कारण है। तृष्णा से ही समस्त दुःखों की उत्पत्ति होती है।

    3. दुख निरोध (निर्वाण)।

    • दुःख निरोध (निर्वाण) तीसरा आर्यसत्य इन दुःखों का निरोध किया जा सकता है। कारण के नष्ट कर देने से कार्य स्वतः नष्ट हो जाता है। इन दुःखों का कारण इच्छा, अभिलाषा, लालसा या तृष्णा है। इनका त्याग कर देने से दुःख समाप्त हो जाते हैं।

    4. दुख निरोधगामिनी प्रतिपदा।

    • दुःख निरोग मार्ग चौथा आर्यसत्य दुःखों को त्याग करने का मार्ग है। इस मार्ग को आर्य अष्टािंगिक मार्ग कहते हैं।

    Ques 6. बौद्ध धर्म के त्रिरत्न क्या है?

    Ans. बौद्ध धर्म के त्रिरत्न :-

    1. बुद्ध।

    • बुद्ध का अर्थ तार्किक ज्ञान से है अर्थात् जागृत मनुष्य या अनंत ज्ञानी मनुष्य जिसने खुद के प्रयासों से बुद्धत्व या ज्ञान प्राप्त किया है।

    2. धम्म।

    • धम्म का अर्थ शिक्षा व आचार संहिता से है अर्थात् बौद्ध धर्म की शिक्षाओ को धम्म कहा गया है सम्पूर्ण बौद्ध धर्म “धम्म” पर आधारित है। और साथ ही इसमें बौद्ध धर्म संबंधित नियम भी करते है।

    3. संघ।

    •  संघ अर्थात् संघटन बौद्ध भिझु व बौद्ध उपासक दोनों इसमें शामिल है।

    Ques 7. बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग क्या है?

    Ans. बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग :-

    1. सम्यक् दृष्टि       :-  वस्तु के वास्तविक स्वरूप की समझ।
    2. सम्यक् संकल्प   :-  लाभ, द्वेष वह हिंसा से मुक्त विचार।
    3. सम्यक् वाक्      :-  अप्रिय वचनों का त्याग।
    4. सम्यक्  कर्माक  :-  सत्कर्म का अनुसरण।
    5. सम्यक् आजीव   :-  सदाचार युक्त आजीविका।
    6. सम्यक् व्यायाम  :-  मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य।
    7. सम्यक् स्मृति     :-  सात्विक भाव।
    8. सम्यक् समाधि   :-  एकाग्रता।

     

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