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    सम्राट अशोक का इतिहास – UPSC Hindi Notes | 1

    सम्राट अशोक

    हेलो दोस्तों आपका INDIA TODAY ONE blog में स्वागत है। इस लेख में हम सम्राट अशोक का इतिहास जानेंगे और हम यह भी जाएंगे कि क्यों अशोक को अशोक महान कहा जाता है। तथा कैसे एक युद्ध से अशोक का मन परिवर्तन हो गया और उन्होंने युद्ध का मार्ग छोड़ कर धम्म का मार्ग अपना लिया।

    सम्राट अशोक

    सम्राट अशोक का जीवन परिचय :-

    सम्राट अशोक

    नामसम्राट अशोक
    जन्म और स्थान304 ई.पू. पाटलिपुत्र (बिहार)
    राज्याभिषेक269 ई. पू.
    शासनकाल269 ई.पू से 232 ई.पू.
    पिताबिन्दुसार
    माताशुभाद्रंगी
    दादाचंद्रगुप्त मौर्य
    पत्नीदेवी, कारुवाकी, पद्मावती, तिष्यरक्षिता
    मृत्यु232 ई.पु.

    सम्राट अशोक से संबंधित कुछ अन्य जानकारी :-

    • अशोक का वास्तविक राज्याभिषेक 269 ई. पू. में हुआ। इससे पहले अशोक उज्जैन का राज्यपाल था।
    • जैन अनुश्रुति के अनुसार अशोक ने बिंदुसार की इच्छा के विरुद्ध मगध के शासन पर अधिकार कर लिया। सिंहली अनुश्रुति के अनुसार अशोक ने अपने 99 भाइयों की हत्या कर सिंहासन प्राप्त किया।
    • महाबोधिवंश तथा तारानाथ के अनुसार सत्ता प्राप्ति के लिये गृहयुद्ध में अपने भाइयों का वध करके अशोक ने साम्राज्य प्राप्त किया।
    • अशोक को उसके अभिलेखों में सामान्यतः ‘देवनांपिय पियदसि’ (देवों का प्यारा) उपाधि दी गई हैं।
    • अशोक नाम का उल्लेख :- मास्की, गुर्जरा, नेट्टूर तथा उदेगोलम अभिलेख में ही मिलता है।
    • पुराणों में उसे ”अशोकवर्धन” तथा दीपवंश में ”करमोली” कहा गया है।
    • राज्याभिषेक से संबंधित ”मास्की” के लघु शिलालेख में अशोक ने स्वयं को बुद्ध शाक्य कहा।

    सम्राट अशोक का साम्राज्य :-

    सम्राट अशोक

    • कई अभिलेखों से स्पष्ट हो जाता है कि उसका साम्राज्य उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत अफगानिस्तान से लेकर दक्षिण में कर्नाटक तथा पश्चिम में काठियावाड (गुजरात) से लेकर पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक विस्तृत था।
    • कल्हण की ‘राजतरंगिणी’ से पता चलता है कि उसका अधिकार कश्मीर पर भी था। इसके अनुसार उसने वहा धर्मारिणी विहार में ‘अशोकेश्वर’ नामक मंदिर की स्थापना करवाई थी। कश्मीर में “श्रीनगर” तथा नेपाल में “देवपत्तन” नामक नगर बसाया।

    अशोक के अभिलेख :-

    सम्राट अशोक

    • भारत में शिलालेख का प्रचलन सर्वप्रथम अशोक ने किया। अशोक के अभिलेख राज्यादेश के रूप में जारी किये गए। वह पहला शासक था, जिसने अभिलेखों के द्वारा जनता को संबोधित किया।
    • अशोक के अभिलेखों को दो वर्गों में विभाजन किया जा सकता है।
    1. शिलालेख  :- इन्हें दो वर्गों बृहद शिलालेख तथा लघु शिलालेख में बाँटा जा सकता है।
    2. स्तंभ लेख :- इन्हें दो वर्गों दीर्घ स्तंभलेख एवं लघु स्तंभलेख में विभाजित किया जाता है।

    1. अशोक के शिलालेख :-

    सम्राट अशोक

    • शिलालेख  :- इन्हें दो वर्गों बृहद शिलालेख तथा लघु शिलालेख में बाँटा जा सकता है।
    (A.) बृहद शिलालेख :-
    • अशोक के 14  बृहद शिलालेख विभिन्‍न लेखों का समूह है जो आठ भिन्‍न-भिन्‍न स्थानों से प्राप्त किए गये हैं।
    धौलीयह ओडिशा के (भुवनेश्वर, खोरधा जिला) में है।
    शाहबाज गढ़ीयह पाकिस्तान (पेशावर) में है।
    मान सेहरायह पाकिस्तान के हजारा जिले में स्थित है।
    कंदहारयह पाकिस्तान में है।
    कालसीयह वर्तमान उत्तराखण्ड (देहरादून) में है।
    जौगढ़यह उड़ीसा के जौगढ़ में स्थित है।
    सोपारायह महाराष्ट्र के पालघर जिले में है।
    एरागुडियह आन्ध्र प्रदेश के कुर्नूल जिले में स्थित है।
    गिरनारयह काठियावाड़ में जूनागढ़ के पास है। 
    शिशुपालगरयह ओडिशा में स्थित है।
    • अशोक के 14 बृहद शिलालेखो का विषय अर्थात् इनमें क्या लिखा है।
    प्रथम शिलालेखइसमें पशु बलि की निंदा की गई है। किसी भी पशु  वध न किया जाए।
    दूसरा शिलालेखइसमें मनुष्य एवं पशुओं के लिए चिकित्सा की स्थापना का उल्लेख है इस अभिलेख में अशोक ने अपने सीमावर्ती राज्यों (चोल पांडय सतियपुत्र केरल पुत्र ताम्रपर्णी (श्रीलंका) की चर्चा की है।
    तीसरा शिलालेखइसमें धर्म प्रचार के लिए राजकीय पदाधिकारियों को आदेश दिए गए हैं अर्थात् पदाधिकारियों अधिकारियों की नियुक्ति की चर्चा है।
    चौथा शिलालेखइसमें ब्राह्मणों एवं साधु के सम्मान की बात कही गई है। राजकीय पदाधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि व्यवहार के सनातन नियमों यथा नैतिकता एवं दया का सर्वत्र प्रचार प्रसार किया जाए।
    पांचवा शिलालेख इसमें धम्म महामात्र नामक अधिकारियों की नियुक्ति का उल्लेख है।
    छठा शिलालेखइसमें लिखा कि सर्वलोकहित मेरा कर्तव्य है मुझे किसी भी समय या स्थान पर चाहे मैं भोजन करता रहूं, शयनकक्ष में रहूं, सर्वलोकहित के संबंध में मुझ से मिलकर सूचनाएं दे सकते हैं।
    सातवां शिलालेखइसमें धार्मिक सहिष्णुता उदारता का उल्लेख मिलता है। सभी जाति, सम्प्रदाय के व्यक्ति सब स्थानों पर रह सकें क्योंकि वे सभी आत्म-संयम एवं ह्रदय की पवित्रता चाहते हैं।
    आठवां शिलालेखइसमें लिखा है कि अब उसने शिकार करना छोड़ दिया है और वह धम्म यात्रा करता है।
    नवां शिलालेखइसमें मांगलिक कार्यों जैसे जन्मोत्सव विवाह जैसे सामाजिक  समारोह पर होने वाले अपव्यय की निंदा की गई है। दास तथा सेवकों के प्रति शिष्टाचार का अनुपालन करें।
    दशवां शिलालेखइसमें यश एवं कीर्ति की परवाह किए बगैर कार्य करने पर बल दिया गया है।
    ग्यारहवां शिलालेखइसमें घम्म निति की व्याख्या की गई है। विभिन्न अवसरों पर किए जानें वाले दान की चर्चा की गई।
    बारहवां शिलालेखइसमें इतझिक महामात्र (स्त्री अध्यक्ष) नामक अधिकारियों की नियुक्ति की चर्चा है। यह शिलालेख धार्मिक उदारता का परिचय भी देता है।
    तेरहवां शिलालेखयह सर्वाधिक लंबा है। इसमें कलिंग युद्ध को वर्णन है। इसमें पांच विदेशी राज्य व शासकों का वर्णन है। साथ ही चोल एवं पांडय राज्य का उल्लेख है। इसमें अशोक ने आठ जनजातियों को अनुशासन में रहने की चेतावनी दी और ऐसा न होने पर उन्हें दंडित करने की बात की इस में अशोक ने ह्रदय परिवर्तन की बात की।
    चौदहवां शिलालेखइसमें अशोक अपने विशाल साम्राज्य के विभिन्न स्थानों पर शिलाओं के ऊपर धम्म लिपिबद्ध कराया,जिसमें धर्म प्रशासन संबंधी महत्वपूर्ण सूचनाओं का विवरण है।
    (B.) लघु शिलालेख :-
    • अशोक के लघु शिलालेख, 14 बृहद शिलालेखो के मुख्य वर्ग में सम्मिलित नहीं है इन्हें लघु शिलालेख कहा जाता है। ये निम्नांकित स्थानों से प्राप्त हुए हैं।
    रूपनाथयह मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में है। (ई.पू. 232)
    गुजरीयह मध्य प्रदेश के दतिया जिले में है। इसमें अशोक का नाम अशोक लिखा गया है।
    भाबरूयह राजस्थान के जयपुर जिले के विराटनगर में है। जिसमे अशोक ने बौद्ध धर्म का वर्णन किया है। यह शिलालेख अशोक के बौद्ध धर्म का अनुयायी होने का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह अशोक के शिलालेखों में से एकमात्र ऐसा शिलालेख है जो बेलनाकार आकृति का है।
    मास्की यह कर्नाटक के रायचूर जिले में स्थित है। इसमें भी अशोक ने अपना नाम अशोक लिखा है इस शिलालेख के माध्यम से सम्राट अशोक के साम्राज्य की दक्षिणी सीमाओं की जानकारी प्राप्त होती है।
    सहसरामयह बिहार के शाहाबाद जिले में है।
    महास्थानयह बांग्लादेश के पुंदरुनगर में स्थित है, इसके माध्यम से सम्राट अशोक के राज्य की पूर्वी सीमाओं की जानकारी मिलती है।

    2. अशोक के स्तंभ लेख :-

    सम्राट अशोक

    • स्तंभ लेख :- इन्हें दो वर्गों दीर्घ स्तंभलेख एवं लघु स्तंभलेख में विभाजित किया जाता है।
    (A.) दीर्घ स्तंभलेख :-
    • अशोक के दीर्घ स्तंभ लेखों की संख्या 7 है जो छः भिन्न स्थान में पाषाण स्तंभों पर उत्कीर्ण पाये गए हैं।
    प्रयाग स्तंभ लेख या इलाहाबाद स्तंभ लेखयह पहले कौशाम्बी में स्थित था। अकबर के शासनकाल में जहाँगीर द्वारा इसे इलाहाबाद के किले में रखा गया।
    दिल्ली टोपरायह स्तंभ फिरोजशाह तुगलक द्वारा टोपरा से दिल्ली लाया गया था।
    दिल्ली मेरठयह स्तंभ फिरोजशाह तुगलक द्वारा मेरठ से दिल्ली लाया गया था।
    रामपुरवायह स्तंभ लेख चंपारण बिहार में स्थित है। इसकी खोज 1872 ई. में करलायल ने की थी।
    लौरिया अरेराजयह स्तंभ लेख चंपारण बिहार में स्थित है।
    लौरिया नंदनगढ़यह स्तंभ लेख भी चंपारण बिहार में स्थित है। इस स्तंभ पर मोर का चित्र बना है।
    (B) लघु स्तंभलेख :-
    • अशोक लघु स्तम्भलेख निम्न स्थानों पर स्थित हैं।
    सांचीयह मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में है।
    सारनाथयह उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में है।
    रूभ्मिनदेईयह नेपाल के तराई में है।
    कौशाम्बीयह इलाहाबाद के निकट है।
    निग्लीवायह नेपाल के तराई में है।
    ब्रह्मगिरियह मैसूर के चिबल दुर्ग में स्थित है।
    सिद्धपुरयह ब्रह्मगिरि से एक मील उ. पू. में स्थित है।
    जतिंग रामेश्‍वरयह ब्रह्मगिरि से तीन मील उ. पू. में स्थित है।
    एरागुडियह आन्ध्र प्रदेश के कूर्नुल जिले में स्थित है।
    गोविमठयह मैसूर के कोपवाय नामक स्थान के निकट है।
    पालकिगुण्कयह गोविमठ की चार मील की दूरी पर है।
    राजूल मंडागिरियह आन्ध्र प्रदेश के कूर्नुल जिले में स्थित है।
    अहरौरायह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित है।
    सारो-मारोयह मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित है।
    नेतुरयह मैसूर जिले में स्थित है।

    अशोक के अभिलेखों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य :-

    • अशोक के लघु शिलालेख, स्तंभ लेख (दीर्घ एवं लघु) एवं गुहालेख की लिपि ब्राह्मी हैं।
    • अशोक के सभी अभिलेखों का विषय प्रशासनिक था, जबकि रुम्मिनदई अभिलेख (सर्वाधिक छोटा अभिलेख) का विषय आर्थिक था।
    • कौशांबी तथा प्रयाग के स्तंभ लेखों में अशोक की रानी कारुवाकी के द्वारा दान दिये जाने का उल्लेख है। इसे ‘रानी का अभिलेख’ भी कहा जाता है।

    कलिंग का युद्ध :-

    युद्ध कलिंग युद्ध।
    युद्ध किसके बीच हुआकलिंग (राजा महा पद्मनाभन) और मौर्य साम्राज्य (सम्राट अशोक) के बिच।
    युद्ध स्थल कलिंग (वर्तमान ओडिशा)
    युद्ध कब हुआ261 ई.पू.।
    विजयमौर्य साम्राज्य (सम्राट अशोक) की।

    कलिंग युद्ध का सम्राट अशोक पर प्रभाव :-

    • अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 8वें वर्ष बाद लगभग 261 ई.पू. में कलिंग पर आक्रमण किया और कलिंग की राजधानी तोसली पर अधिकार कर लिया। यह वर्तमान ओडिशा के दक्षिणी भाग में स्थित है। अशोक के तेरहवें अभिलेख से कलिंग युद्ध के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है।
    • कलिंग युद्ध में हुए नरसंहार से विचलित अशोक ने युद्ध की नीति को सदा के लिये त्याग दिया। कलिंग के भारी नरसंहार के बाद अशोक को गहरी व्यथा और पश्चाताप हुआ, इसलिए उसने दूसरे राज्यों पर भौतिक विजय छोड़कर सांस्कृतिक विजय पाने की नीति अपनाई।

    आंतरिक नीति और सम्राट अशोक पर बौद्ध धर्म प्रभाव :-

    • अशोक शुरुआत में ब्राह्मण धर्म का अनुयायी था परंतु बाद में बौद्ध अनुयाई बन गया।
    • अशोक ने बौद्ध धर्म को अपार धन दिया, तथा बौद्ध धर्म स्थलों की यात्रा की।
    • अशोक ने बौद्ध धर्म और धम्म का प्रचार करने के लिए अन्य देशों में मिशनरियों को भेजा, ताकि अधिक से अधिक लोग अहिंसक जीवन शैली अपना सकें।
    • इस तरह के शिलालेख अभी भी भारत और बाहरी देशों में मौजूद हैं। उसके बाद 40 वर्षों तक, अशोक महान ने शांति, सद्भाव, मानवता, प्रेम, अहिंसा और समृद्धि के माध्यम से मौर्य साम्राज्य का नेतृत्व किया।
    • इसका वृतांत (संकेत) उसके अभिलेखों में आए धम्म यात्रा शब्द से मिलता है।
    • अशोक ने बौद्ध धर्म का तीसरा सम्मेलन (संगीत) आयोजित किया।
    • अशोक ने नारी सहित, समाज के विभिन्न वर्गों के बीच धर्म का प्रचार करने के लिए धम्ममहामात्र बहाल (नियुक्त) किए।
    • अपने साम्राज्य में न्याय कार्य के लिए राजको को भी नियुक्त किया।
    • अशोक कर्मकांडों का विशेषतः स्त्रियों में प्रचलित अनुष्ठानों या रस्मो का विरोधी रहा था। इसने तड़क-भड़क वाले सामाजिक समारोह पर रोक लगा दी थी।
    • अशोक ने लोगों को जियो और जीने दो का पाठ पढ़ाया, जीवो के प्रति दया तथा बांधवों के प्रति सद्व्यवहार की सीख दी।
    • अशोक के उपदेशों का उद्देश्य सहिष्णुता के आधार पर तत्कालीन समाज व्यवस्था को बनाए रखना था।

    इतिहास में सम्राट अशोक का स्थान :-

    • अशोक ने राजनीतिक एकता स्थापित कर, एक धर्म, एक भाषा, और प्रायः एक लिपि के सूत्र में सारे देश को बांध दिया।
    • धर्म प्रचार के कार्य में अशोक का अपार उत्साह था, उसने साम्राज्य के सुदूर भागों में भी अपने अधिकारियों को तैनात किया, इससे प्रशासन कार्य में लाभ हुआ और साथ ही विकसित गंगा के मैदान और पिछड़े दूरवर्ती प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क बढ़ा ।
    • भारतीय इतिहास में इस तरह की नीति को अपनाने वाला अशोक के सामने कोई आदर्श नहीं था, भले ही मिस्र इसका एक अपवाद हो जहां अखनातन ईसा पूर्व 4वीं सदी में शांतिवादी नीति को अपनाया। लेकिन अशोक को इस मिस्री चिंतक की जानकारी नहीं थी।
    • अशोक की मृत्यु 232 ई.पू. के लगभग हुई। उसके एक लघुस्तंभ लेख में केवल एक पुत्र तीवर का उल्लेख मिलता है, जबकि अन्य स्रोत इसके विषय में मौन हैं।
    • सभी पुराण ब्रहद्रथ को ही मौर्य वंश का अंतिम शासक मानते हैं। उसका सेनापति पुष्यमित्र शुंग था।
    • पुष्यमित्र शुंग ने 185 ई. पू. के लगभग बृहद्रथ को सेना का निरीक्षण करते समय धोखे से उसकी हत्या कर दी। बृहद्रथ की मृत्यु के साथ ही मौर्य वंश का अंत हो गया।

    सम्राट अशोक की मृत्यु

    • अशोक की मृत्यु 232 ई.पू. के लगभग हुई। ऐसा माना जाता है की सम्राट अशोक के जीवन का अंतिम समय पाटलिपुत्र, पटना में ही बीता था।

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    FAQ

    Ques 1. सम्राट अशोक कहाँ के राजा थे?
    Ans. सम्राट अशोक मगध के राजा थे। और इन की राजधानी पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) थी।

    Ques 2. सम्राट अशोक कौन से वंश के थे?
    Ans. सम्राट अशोक मौर्य वंश के थे और चंद्रगुप्त मौर्य इसके दादा जी थे।

    Ques 3. अशोक ने अपने भाई को क्यों मारा?
    Ans. जैन अनुश्रुति के अनुसार अशोक ने बिंदुसार की इच्छा के विरुद्ध मगध के शासन पर अधिकार कर लिया। सिंहली अनुश्रुति के अनुसार अशोक ने अपने 99 भाइयों की हत्या कर सिंहासन प्राप्त किया। महाबोधिवंश तथा तारानाथ के अनुसार सत्ता प्राप्ति के लिये गृहयुद्ध में अपने भाइयों का वध करके अशोक ने साम्राज्य प्राप्त किया।

    Ques 4. सम्राट अशोक किस धर्म का अनुयायी था ?
    Ans. अशोक शुरुआत में ब्राह्मण धर्म का अनुयायी था परंतु बाद में बौद्ध धर्म का अनुयाई बन गया।

    Ques 5. सम्राट अशोक का राज्य कहाँ तक फेला था ?
    Ans. अशोक का साम्राज्य :-

    • कई अभिलेखों से स्पष्ट हो जाता है कि उसका साम्राज्य उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत अफगानिस्तान से लेकर दक्षिण में कर्नाटक तथा पश्चिम में काठियावाड (गुजरात) से लेकर पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक विस्तृत था।
    • कल्हण की ‘राजतरंगिणी’ से पता चलता है कि उसका अधिकार कश्मीर पर भी था। इसके अनुसार उसने वहा धर्मारिणी विहार में ‘अशोकेश्वर’ नामक मंदिर की स्थापना करवाई थी। कश्मीर में “श्रीनगर” तथा नेपाल में “देवपत्तन” नामक नगर बसाया।

    Ques 6. कलिंग का युद्ध कब और किसके बीच हुआ?
    Ans. कलिंग का युद्ध 261 ई.पू. कलिंग (राजा महा पद्मनाभन) और मौर्य साम्राज्य (सम्राट अशोक) के बिच हुआ।

    Ques 7. कलिंग युद्ध किसने जीता था?
    Ans. कलिंग का युद्ध 261 ई.पू. कलिंग (राजा महा पद्मनाभन) और मौर्य साम्राज्य (सम्राट अशोक) के बिच हुआ। जिसमें मौर्य साम्राज्य (सम्राट अशोक) की विजय हुई।

    Ques 8. भारत में कलिंग कहां है?
    Ans. वर्तमान में भारत में कलिंग ओडिशा में है।

    Ques 9. सबसे लंबा अभिलेख कौन सा है?
    Ans.  सम्राट अशोक का तेरहवां शिलालेख यह सर्वाधिक लंबा है। इसमें कलिंग युद्ध को वर्णन है। इसमें पांच विदेशी राज्य व शासकों का वर्णन है। साथ ही चोल एवं पांडय राज्य का उल्लेख है। इसमें अशोक ने आठ जनजातियों को अनुशासन में रहने की चेतावनी दी और ऐसा न होने पर उन्हें दंडित करने की बात की इस में अशोक ने ह्रदय परिवर्तन की बात की।

    Ques 10. अशोक का सबसे छोटा शिलालेख कौनसा है?
    Ans. अशोक का सबसे छोटा शिलालेख रुम्मिनदई शिलालेख हैं। तथा अशोक के सभी अभिलेखों का विषय प्रशासनिक था, जबकि रुम्मिनदई अभिलेख (सर्वाधिक छोटा अभिलेख) का विषय आर्थिक था।

    Ques 11. अशोक का सबसे बड़ा अभिलेख कौनसा था?
    Ans. सम्राट अशोक का तेरहवां शिलालेख  यह सर्वाधिक लंबा है। इसमें कलिंग युद्ध को वर्णन है। इसमें पांच विदेशी राज्य व शासकों का वर्णन है। साथ ही चोल एवं पांडय राज्य का उल्लेख है। इसमें अशोक ने आठ जनजातियों को अनुशासन में रहने की चेतावनी दी और ऐसा न होने पर उन्हें दंडित करने की बात की इस में अशोक ने ह्रदय परिवर्तन की बात की।

    Ques 12. रानी का अभिलेख कहाँ स्थित है?
    Ans. कौशांबी तथा प्रयाग के स्तंभ लेखों में अशोक की रानी कारुवाकी के द्वारा दान दिये जाने का उल्लेख है। इसे ‘रानी का अभिलेख’ भी कहा जाता है।

    Ques 13. रानी का अभिलेख कोनसा है?
    Ans. कौशांबी तथा प्रयाग के स्तंभ लेखों में अशोक की रानी कारुवाकी के द्वारा दान दिये जाने का उल्लेख है। इसे ‘रानी का अभिलेख’ भी कहा जाता है।

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