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    अष्टांग नमस्कार योगासन करने का तरीका और फायदे | 1

    अष्टांग नमस्कार

    हेलो दोस्तों आपका INDIA TODAY ONE blog में स्वागत है। इस लेख में हम अष्टांग नमस्कार योगासन के बारे में जानकारी देंगे।

    यह एक ऐसा योगासन है जिसका अभ्यास करते समय शरीर के कुल आठ अंग भूमि को स्पर्श करते हैं। इसलिए इस आसन को अष्टांग अर्थात् शरीर के आठ अंगों से किया जाने वाला नमस्कार योग आसन भी कहा जाता है। इसके अभ्यास से आपके पूरे शरीर में लचीलापन बना रहता है और साथ ही रक्त परिसंचरण (blood circulation) अच्छा रहता है।

    इसलिए, इस लेख में हम अष्टांग नमस्कार के बारे में जानेंगे। अष्टांग नमस्कार क्या है, अष्टांग नमस्कार करने का सही तरीका, अष्टांग नमस्कार करने के फायदे और सावधानियों के बारे में जानकारी देंगे। 

    अष्टांग नमस्कार योगासन का शाब्दिक अर्थ।

    • अष्टांग नमस्कार जिसमें अष्टांग का अर्थ आठ अंग और नमस्कार का अर्थ प्रणाम हैं। इसमें शरीर के आठों अंगों (दोनों पैर, दोनों हाय, दोनों घुटने, छाती एवं ठुड्डी) आते हैं। जिनको झुकाकर नमस्कार करना। इस कारण इस आसन को अष्टांग नमस्कार योग आसन कहते हैं। कुछ योग शिक्षक इसको प्रणिपातासन कहते हैं।

    अष्टांग नमस्कार योगासन करने का सही तरीका।

    अष्टांग नमस्कार योगासन करने की विधि।

    अष्टांग नमस्कार

    विधि।

    • सर्वप्रथम अपने आसन पर पेट के बल उत्तर या पूर्व की दिशा की तरफ़ सिर करके लेट जाएँ। दिशाओं का महत्त्व आध्यात्मिक कारणों से।
    • अब अपने दोनों पैर की अंगुलियाँ, दोनों घुटने, दोनों हाथों की हथेलियाँ, छाती व ठुड्डी शरीर के यह सभी अंग पृथ्वी को स्पर्श करें। इनके अलावा शरीर कोई भी अंग पृथ्वी को स्पर्श न करें। (चित्रनुसार)
    • अभ्यास के दौरान श्वास की गति सामान्य रुप से चलने दे। और अपनी क्षमता अनुसार इसी मुद्रा में रुके रहे।

    ध्यान।

    • अभ्यास के दौरान अपने ईष्ट भगवान या गुरु का ध्यान करें।
    • और इस आसन को करते समय अपना ध्यान मूलाधार चक्र से उठती हुई शक्ति पर केंद्रित करें, जो कि सहस्रार की तरफ़ प्रभाहित हो रही है। तथा शरीर के रोगों का नाश हो रहा है, ऐसा ध्यान करें।

    श्वास का क्रम।

    • श्वास का क्रम और समय ऊपर विधि में बताया गया है।

    अष्टांग नमस्कार योगासन का अभ्यास करने के लिए इस वीडियो की मदद लें।

    अष्टांग नमस्कार योगासन करने के फायदे।

     

    अष्टांग नमस्कार योगासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • नियमित अभ्यास करने से आपका प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) मजबूत होता है।
    • पाचन तंत्र ठीक रहता है और साथ ही इससे पेट की मांसपेशियां मजबूत होती है।
    • छाती को खोलने में मदद करता है। और फेफड़ों से सम्बंधित बीमारियों को रोकने में मददगार है।
    • पीठ के लिए लाभदायक आसन है। और यह आसन मेरुदण्ड के रोग में अति लाभकारी है।
    • यह आसन शरीर को पूर्ण आराम देता है एवं नई चेतना का संचार करता है।
    • यह आसन सूर्य नमस्कार का एक हिस्सा है। और मानसिक शांति प्रदान करता है। 
    • हाथ संतुलन (arm balancing) में अहम भूमिका निभाता है।

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    सारांश।

    योग करना अच्छी आदत है। कभी भी जल्दी फायदे पाने के चक्कर में शरीर की क्षमता से अधिक  योगाभ्यास करने की कोशिश न करें। योगासनों का अभ्यास किसी भी वर्ग विशिष्ट के लोग कर सकते हैं। 

    अष्टांग नमस्कार योगासन, इस योगासन के नियमित अभ्यास से शरीर से सम्बंधित बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है। किन्तु हमारी मंत्रणा यही है कि कभी भी किसी अनुभवी योगाचार्य या योग विशेषज्ञ (yoga Expert) की मदद के बिना मुश्किल योगासनों का अभ्यास या आरंभ न करें। किसी योग शिक्षक की देखरेख में ही मुश्किल योगासनों का अभ्यास करें। इसके अलावा अगर कोई गंभीर बीमारी हो तो योगासन का आरंभ करने से पहले डॉक्टर या अनुभवी योगाचार्य की सलाह जरूर लें

     

    FAQs 

     

    Ques 1. अष्टांग नमस्कार योगासन करने की विधि?

    Ans. अष्टांग नमस्कार योगासन करने की विधि।

    • सर्वप्रथम अपने आसन पर पेट के बल उत्तर या पूर्व की दिशा की तरफ़ सिर करके लेट जाएँ। दिशाओं का महत्त्व आध्यात्मिक कारणों से।
    • अब अपने दोनों पैर की अंगुलियाँ, दोनों घुटने, दोनों हाथों की हथेलियाँ, छाती व ठुड्डी शरीर के यह सभी अंग पृथ्वी को स्पर्श करें। इनके अलावा शरीर कोई भी अंग पृथ्वी को स्पर्श न करें। (चित्रनुसार)
    • अभ्यास के दौरान श्वास की गति सामान्य रुप से चलने दे। और अपनी क्षमता अनुसार इसी मुद्रा में रुके रहे।

     

    Ques 2. अष्टांग नमस्कार आसन करने के क्या फायदे  है?

    Ans. अष्टांग नमस्कार योगासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • नियमित अभ्यास करने से आपका प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) मजबूत होता है।
    • पाचन तंत्र ठीक रहता है और साथ ही इससे पेट की मांसपेशियां मजबूत होती है।
    • छाती को खोलने में मदद करता है। और फेफड़ों से सम्बंधित बीमारियों को रोकने में मददगार है।
    • पीठ के लिए लाभदायक आसन है। और यह आसन मेरुदण्ड के रोग में अति लाभकारी है।
    • यह आसन शरीर को पूर्ण आराम देता है एवं नई चेतना का संचार करता है।
    • यह आसन सूर्य नमस्कार का एक हिस्सा है। और मानसिक शांति प्रदान करता है। 
    • हाथ संतुलन (arm balancing) में अहम भूमिका निभाता है।

     

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