• Sat. Jul 20th, 2024

    INDIA TODAY ONE

    Knowledge

    जठर परिवर्तनासन करने का तरीका और फायदे – jathar parivartanaasan of Method and benefits in Hindi | 1

    जठर परिवर्तनासन

    हेलो दोस्तों आपका INDIA TODAY ONE blog में स्वागत है। इस लेख में हम जठर परिवर्तनासन  करने का तरीका और फायदो के बारे में जानेंगे और साथ में यह भी जानेंगे कि योगासन करने के क्या नियम होते हैं।

    जठर परिवर्तनासन करने का तरीका

    जठर परिवर्तनासन करने के फायदे

    जठर परिवर्तनासन

    जठर परिवर्तनासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे :-

    • जठर परिवर्तनासन के अभ्यास से पेट के अंगों की बेहतरीन तरीके से मालिश होती है। और पाचन से संबंधित लगभग सभी प्रकार के विकार दूर होते हैं। जैसे :- अपच, पेट फूलना, गैस, एसिडिटी ,खट्टी डकार आना आदि।
    • जो लोग लगातार लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे कर कार्य करते हैं। जिससे काफी थकान का अनुभव होता है। तो इसके लिए जठर परिवर्तनासन बेहद फायदेमंद आसन है।
    • जठर परिवर्तनासन में दिन भर की थकान को दूर करने की अद्भुत क्षमता है। इस आसन को करने से स्पाइनल (रीढ़ की हड्डी में) पर प्रभाव पड़ता है। जिसके कारण तंत्रिका तंत्र (nervous system) सक्रिय होता है।
    • किडनी से संबंधित समस्यो को दूर करने के लिए यह आसन रामबाण है। जठर परिवर्तनासन के निरंतर अभ्यास करने से किडनी से संबंधित रोग समाप्त हो जाते हैं।
    • जठर परिवर्तनासन के निरंतर अभ्यास करने से पेट की चर्बी कम होती है।
    • जठर परिवर्तनासन का अभ्यास करते समय पेट व कमर में खिंचाव उत्पन्न होता है। इस खिंचाव के कारण कमर व पेट में जमी हुई अतिरिक्त फैट घटने लगती है जिससे मोटापा दूर होता है। अर्थात् मोटापे को कम करता है।
    • जठर परिवर्तनासन के निरंतर अभ्यास मधुमेह व शुगर जैसी बिमारियों को नियंत्रण किया जा सकता है।
    • जठर परिवर्तनासन के अभ्यास से गर्दन व कमर के दर्द से राहत मिलती हैं।
    • जठर परिवर्तनासन का निरंतर अभ्यास करते हैं तो गैस व एसिडिटी जैसी समस्या दूर हो जाती है।
    • इस आसन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली व मजबूत होती हैं।

    👉 यह भी पढ़ें

    योग के नियम

    • अगर आप इन कुछ सरल नियमों का पालन करेंगे, तो अवश्य ही आपको योग अभ्यास का पूरा लाभ मिलेगा।
    • किसी गुरु के निर्देशन में योग अभ्यास आरम्भ करें।
    • सूर्योदय या सूर्यास्त के वक़्त योग का सही समय है।
    • योग करने से पहले स्नान ज़रूर करें।
    • योग खाली पेट करें और योग करने के 2 घंटे पहले कुछ ना खायें।
    • योग आरामदायक सूती कपड़े पहन के करे
    • तन की तरह मन भी स्वच्छ होना चाहिए योग करने से पहले सब बुरे ख़याल दिमाग़ से निकाल दें।
    • किसी शांत वातावरण और साफ जगह में योग अभ्यास करें।
    • अपना पूरा ध्यान अपने योग अभ्यास पर ही केंद्रित रखें।
    • योग अभ्यास धैर्य और दृढ़ता से करें।
    • अपने शरीर के साथ जबरदस्ती बिल्कुल ना करें।
    • धीरज रखें। योग के लाभ महसूस होने मे वक़्त लगता है।
    • निरंतर योग अभ्यास जारी रखें।
    • योग करने के 30 मिनिट बाद तक कुछ ना खायें। 1 घंटे तक न नहायें।
    • प्राणायाम हमेशा आसन अभ्यास करने के बाद करें।
    • अगर कोई मेडिकल तकलीफ़ हो तो पहले डॉक्टर से ज़रूर सलाह करें।
    • अगर तकलीफ़ बढ़ने लगे या कोई नई तकलीफ़ हो जाए तो तुरंत योग अभ्यास रोक दें।
    • योगाभ्यास के अंत में हमेशा शवासन करें।

    योग के प्रमुख उद्देश्य 

    योग के उद्देश्य :-

    • तनाव से मुक्त जीवन
    • मानसिक शक्ति का विकास करना
    • प्रकृति के विपरीत जीवन शैली में सुधार करना
    • निरोगी काया
    • रचनात्मकता का विकास करना
    • मानसिक शांति प्राप्त करना
    • सहनशीलता में वृद्धि करना
    • नशा मुक्त जीवन
    • वृहद सोच
    • उत्तम शारीरिक क्षमता का विकास करना

    योग के लाभ/महत्व

    • रोज सुबह उठकर योग का अभ्यास करने से अनेक फायदे हैं योग मन, मस्तिष्क, ध्यान और शरीर के सभी अंगो का एक संतुलित वर्कआउट है जो आपके सोच-विचार करने की शक्ति व मस्तिष्क के कार्यों को बढ़ाता है तनाव को कम करता है।
      योग मन को अनुशासित करता है।
    • जहां जीम व एक्सरसाइज आदि से शरीर के किसी विशेष अंग का विकास या व्यायाम हो पाता है वही योग करने से शरीर के समस्त अंगों का, ज्ञानेंद्रियों, इंद्रियों, ग्रंथियों का विकास और व्यायाम होता है जिससे शरीर के समस्त अंग सुचारू रूप से कार्य करते हैं।
    • प्रतिदिन योग करने से शरीर निरोगी बनता है।
    • योग का प्रयोग शारीरिक,मानसिक,बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास के लिए हमेशा से होता आ रहा है आज की चिकित्सा शोधों व डॉक्टरों ने यह साबित कर दिया है कि YOGA शारीरिक और मानसिक रूप से मानव जाति के लिए वरदान है।
    • योग एकाग्रता को बढ़ाता है। प्रतिदिन योग करने से हमारी अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रता बढ़ती है।
    • प्रतिदिन योगासन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है शरीर स्वस्थ, निरोगी और बलवान बनता है।
    • योग के द्वारा आंतरिक शक्ति का विकास होता है।
    • योग से ब्लड शुगर का लेवल स्थिर रहता है। ब्लड शुगर घटने व बढने की समस्या नहीं होती है।
    • योग कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करता है।
    • योग ज्ञानेंद्रियों, इंद्रियों को जागृत करता है।
    • योग डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद है।
    • योगासनों के नित्य अभ्यास से शरीर की सभी मांसपेशियों का अच्छा विकास व व्यायाम होता है जिससे तनाव दूर होता है
    • अच्छी नींद आती है भूख अच्छी लगती है पाचन तंत्र सही रहता है।
    • योगासनों के नित्य अभ्यास से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। बहुत सी स्टडीज में साबित यह हो चुका है कि अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज के मरीज योग द्वारा पूर्ण रूप से स्वस्थ होते हैं।
    • कुछ योगासनों और मेडिटेशन के द्वारा अर्थराइटिस, कमर में दर्द, घुटनों में दर्द जोड़ों में दर्द आदि दर्द मे काफी सुधार होता है। गोली-दवाइयों की आवश्यकता कम हो जाती है।
    • योग बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद है। योगासनों के नित्य अभ्यास से बच्चों में मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक शक्ति का विकास होता है। जो बच्चे पढ़ाई में कमजोर है वह भी मेडिटेशन के द्वारा पढ़ाई में सर्वश्रेष्ठ हो सकते है अपनी एकाग्रता में सुधार कर सकते है

    FAQ

    Ques 1. जठर परिवर्तनासन करने के क्या फायदे हैं?
    Ans. जठर परिवर्तनासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे :-

    • जठर परिवर्तनासन के अभ्यास से पेट के अंगों की बेहतरीन तरीके से मालिश होती है। और पाचन से संबंधित लगभग सभी प्रकार के विकार दूर होते हैं। जैसे :- अपच, पेट फूलना, गैस, एसिडिटी ,खट्टी डकार आना आदि।
    • जो लोग लगातार लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे कर कार्य करते हैं। जिससे काफी थकान का अनुभव होता है। तो इसके लिए जठर परिवर्तनासन बेहद फायदेमंद आसन है।
    • जठर परिवर्तनासन में दिन भर की थकान को दूर करने की अद्भुत क्षमता है। इस आसन को करने से स्पाइनल (रीढ़ की हड्डी में) पर प्रभाव पड़ता है। जिसके कारण तंत्रिका तंत्र (nervous system) सक्रिय होता है।
    • किडनी से संबंधित समस्यो को दूर करने के लिए यह आसन रामबाण है। जठर परिवर्तनासन के निरंतर अभ्यास करने से किडनी से संबंधित रोग समाप्त हो जाते हैं।
    • जठर परिवर्तनासन के निरंतर अभ्यास करने से पेट की चर्बी कम होती है।
    • जठर परिवर्तनासन का अभ्यास करते समय पेट व कमर में खिंचाव उत्पन्न होता है। इस खिंचाव के कारण कमर व पेट में जमी हुई अतिरिक्त फैट घटने लगती है जिससे मोटापा दूर होता है। अर्थात् मोटापे को कम करता है।
    • जठर परिवर्तनासन के निरंतर अभ्यास मधुमेह व शुगर जैसी बिमारियों को नियंत्रण किया जा सकता है।
    • जठर परिवर्तनासन के अभ्यास से गर्दन व कमर के दर्द से राहत मिलती हैं।
    • जठर परिवर्तनासन का निरंतर अभ्यास करते हैं तो गैस व एसिडिटी जैसी समस्या दूर हो जाती है।
    • इस आसन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली व मजबूत होती हैं।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    error: Content is protected !!

    Discover more from INDIA TODAY ONE

    Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

    Continue reading