• Sat. Jul 20th, 2024

    INDIA TODAY ONE

    Knowledge

    त्रिविक्रमासन करने का तरीका और 10 फायदे – Method and benefits Trivikramasana in Hindi

    त्रिविक्रमासन

    हेलो दोस्तों आपका INDIA TODAY ONE blog में स्वागत है। इस लेख में हम त्रिविक्रमासन के बारे में जानेंगे। त्रिविक्रमासन क्या है, त्रिविक्रमासन करने का सही तरीका, त्रिविक्रमासन करने के फायदे और सावधानियों के बारे में जानकारी देंगे। कुछ योग विशेषज्ञ इस आसन को एक पाद शीर्षासन भी कहते हैं। जबकि एक पादशीर्षासन अन्य प्रकार से भी होता हैं।

    त्रिविक्रमासन करने का सही तरीका।

    त्रिविक्रमासन करने की विधि।

    त्रिविक्रमासन

    विधि।

    • सर्वप्रथम समावस्था में अपने आसन पर खड़े हो जाएँ।
    • यह संतुलन एवं उच्च अभ्यास का आसन है।  अतः सावधानी पूर्वक अपने दाहिने पैर को धीरे-धीरे ऊपर उठाते हुए पहले 90° के कोण पर फिर 180° के कोण पर अपने पैर को लेकर जाएं। (चित्रानुसार)
    • इस स्थिति में उठाया गया दाहिना पैर बिल्कुल गर्दन एवं सिर के समकक्ष होता हैं तथा पादतल आकाश की तरफ़ हो जाएगा।(चित्रानुसार)
    • अंतिम अवस्था में हाथों के द्वारा पर को पकड़ लेने से अभ्यास करने में सरलता होती है।
    • कुछ साधक एक हाथ से पर को पकड़ते हैं और दूसरा हाथ सामने की तरफ तानते हैं।
    • अब यही क्रिया पैर बदलकर दोहराएं।
    • यह संतुलन एवं उच्च अभ्यास का आसन है। यह आसन क्रियात्मक रूप से कठिन है। इस आसन का अभ्यास किसी योग गुरु की देख रेख में और धैर्य पूर्वक करें।

    श्वास का क्रम।

    • अभ्यास के दौरान पैर को ऊपर उठाते समय अंतःकुंभक करें।
    • पूर्ण अवस्था में श्वास की गति सामान्य रखें।
    • वापस मूल अवस्था में आते समय श्वास छोड़ें।

    समय।

    • अपनी क्षमता अनुसार रुकें।

    त्रिविक्रमासन का अभ्यास करने के लिए इस वीडियो की मदद लें।

    त्रिविक्रमासन करने के फायदे।

    त्रिविक्रमासन

    त्रिविक्रमासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • त्रिविक्रमासन अग्रिम स्तर (advance level) का योगासन है। इस योगासन को सीखने व इसमें श्रेष्ठ होने के लिए प्रतिदिन व लंबी अवधि तक इस आसन का अभ्यास करना पड़ता है।
    • नितम्ब के जोड़ एवं कमर को व्यवस्थित करता है। पीठ की माँसपेशियाँ व मेरुदण्ड सुद्रढ़ होते हैं।
    • इस आसन का अभ्यास करने से कूल्हों के जोड़ों व कूल्हों के आस-पास की मांसपेशियों में अधिकतम खिंचाव लगता है जिससे दर्द व जकड़न जैसी समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है। और मांसपेशियों में लचीलापन व मजबूती आती हैं।
    • पैरों की माँसपेशियाँ सशक्त और मजबूत होती है।
    • इस आसन का अभ्यास करने से पैरों की जांघ, पिंडली  और हैमस्ट्रिंग व क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियों में खिंचाव लगता है और वे मजबूत एवं लचीली बनती हैं।
    • हैमस्ट्रिंग मांसपेशि :-  हैमस्ट्रिंग मांसपेशी हिप से लेकर घुटने तक जांघों के पीछे मौजूद मांसपेशी है,जो दौड़ने की क्रिया में शरीर की मदद करती है। खिलाड़ियों के लगातार दौड़ते रहने से इस मांसपेशी में खासा दबाव महसूस होता है।
    • क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियां :- यह जांघ के सामने की मांसपेशियों का एक समूह है। क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियां का उपयोग विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को करने के लिए करते हैं, जैसे :- दौड़ना, किक करना (to kick), कूदना और चलना आदि है।
    • योग शास्त्रों एवं योगाचार्यो के अनुसार माना जाता है कि त्रिविक्रमासन का अभ्यास करने से गुर्दों पर सकारात्मक (Positive) प्रभाव पड़ता है और पथरी जैसे समस्याएं नहीं हो पाती हैं।
    • गुर्दे की पथरी :- पथरी एक कठोर वस्तु या ऐसा समझें पत्थर की तरह होती है, यह तब बनती है जब पेशाब में उपस्थित रासायनिक पदार्थों की सांद्रता उनके निश्चित स्तर से अधिक हो जाती हैं, यानी बहुत कम तरल में बहुत अधिक रासायनिक पदार्थ होते हैं।
    • इस आसन की मदद से मानसिक रोगों का इलाज करने में भी काफी मदद मिलती है। इस योगाभ्यास से चिंताव, तनाव, सिर दर्द व अनिद्रा जैसे लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अर्थात् त्रिविक्रमासन के अभ्यास से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
    • रजोनिवृत्ति (menopause) और मासिक धर्म (menstruation) से संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए इस योगासन का अभ्यास करना बहुत फायदेमंद माना जाता है।
    • इस आसन के अभ्यास से पूरे शरीर को सौष्ठव प्रदान होता है।

    👉 यह भी पढ़ें

    सारांश

    योग करना अच्छी आदत है। कभी भी जल्दी फायदे पाने के चक्कर में शरीर की क्षमता से अधिक योगाभ्यास करने की कोशिश न करें। योगासनों का अभ्यास किसी भी वर्ग विशिष्ट के लोग कर सकते हैं।
    त्रिविक्रमासन, इस योगासन के नियमित अभ्यास से शरीर से सम्बंधित बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है। किन्तु हमारी मंत्रणा यही है कि कभी भी किसी अनुभवी योगाचार्य या योग विशेषज्ञ (yoga Expert) की मदद के बिना मुश्किल योगासनों का अभ्यास या आरंभ न करें। किसी योग शिक्षक की देखरेख में ही मुश्किल योगासनों का अभ्यास करें। इसके अलावा अगर कोई गंभीर बीमारी हो तो योगासन का आरंभ करने से पहले डॉक्टर या अनुभवी योगाचार्य की सलाह जरूर लें

    FAQs

    Ques 1. त्रिविक्रमासन करने की विधि?

    Ans. त्रिविक्रमासन करने की विधि।

    • सर्वप्रथम समावस्था में अपने आसन पर खड़े हो जाएँ।
    • यह संतुलन एवं उच्च अभ्यास का आसन है।  अतः सावधानी पूर्वक अपने दाहिने पैर को धीरे-धीरे ऊपर उठाते हुए पहले 90° के कोण पर फिर 180° के कोण पर अपने पैर को लेकर जाएं। (चित्रानुसार)
    • इस स्थिति में उठाया गया दाहिना पैर बिल्कुल गर्दन एवं सिर के समकक्ष होता हैं तथा पादतल आकाश की तरफ़ हो जाएगा।(चित्रानुसार)
    • अंतिम अवस्था में हाथों के द्वारा पर को पकड़ लेने से अभ्यास करने में सरलता होती है।
    • कुछ साधक एक हाथ से पर को पकड़ते हैं और दूसरा हाथ सामने की तरफ तानते हैं।
    • अब यही क्रिया पैर बदलकर दोहराएं।
    • यह संतुलन एवं उच्च अभ्यास का आसन है। यह आसन क्रियात्मक रूप से कठिन है। इस आसन का अभ्यास किसी योग गुरु की देख रेख में और धैर्य पूर्वक करें।

    Ques 2. त्रिविक्रमासन करने के क्या फायदे है?

    Ans. त्रिविक्रमासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • त्रिविक्रमासन अग्रिम स्तर (advance level) का योगासन है। इस योगासन को सीखने व इसमें श्रेष्ठ होने के लिए प्रतिदिन व लंबी अवधि तक इस आसन का अभ्यास करना पड़ता है।
    • नितम्ब के जोड़ एवं कमर को व्यवस्थित करता है। पीठ की माँसपेशियाँ व मेरुदण्ड सुद्रढ़ होते हैं।
    • इस आसन का अभ्यास करने से कूल्हों के जोड़ों व कूल्हों के आस-पास की मांसपेशियों में अधिकतम खिंचाव लगता है जिससे दर्द व जकड़न जैसी समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है। और मांसपेशियों में लचीलापन व मजबूती आती हैं।
    • पैरों की माँसपेशियाँ सशक्त और मजबूत होती है।
    • इस आसन का अभ्यास करने से पैरों की जांघ, पिंडली  और हैमस्ट्रिंग व क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियों में खिंचाव लगता है और वे मजबूत एवं लचीली बनती हैं।
    • हैमस्ट्रिंग मांसपेशि :-  हैमस्ट्रिंग मांसपेशी हिप से लेकर घुटने तक जांघों के पीछे मौजूद मांसपेशी है,जो दौड़ने की क्रिया में शरीर की मदद करती है। खिलाड़ियों के लगातार दौड़ते रहने से इस मांसपेशी में खासा दबाव महसूस होता है।
    • क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियां :- यह जांघ के सामने की मांसपेशियों का एक समूह है। क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियां का उपयोग विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को करने के लिए करते हैं, जैसे :- दौड़ना, किक करना (to kick), कूदना और चलना आदि है।
    • योग शास्त्रों एवं योगाचार्यो के अनुसार माना जाता है कि त्रिविक्रमासन का अभ्यास करने से गुर्दों पर सकारात्मक (Positive) प्रभाव पड़ता है और पथरी जैसे समस्याएं नहीं हो पाती हैं।
    • गुर्दे की पथरी :- पथरी एक कठोर वस्तु या ऐसा समझें पत्थर की तरह होती है, यह तब बनती है जब पेशाब में उपस्थित रासायनिक पदार्थों की सांद्रता उनके निश्चित स्तर से अधिक हो जाती हैं, यानी बहुत कम तरल में बहुत अधिक रासायनिक पदार्थ होते हैं।
    • इस आसन की मदद से मानसिक रोगों का इलाज करने में भी काफी मदद मिलती है। इस योगाभ्यास से चिंताव, तनाव, सिर दर्द व अनिद्रा जैसे लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अर्थात् त्रिविक्रमासन के अभ्यास से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
    • रजोनिवृत्ति (menopause) और मासिक धर्म (menstruation) से संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए इस योगासन का अभ्यास करना बहुत फायदेमंद माना जाता है।
    • इस आसन के अभ्यास से पूरे शरीर को सौष्ठव प्रदान होता है।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    error: Content is protected !!

    Discover more from INDIA TODAY ONE

    Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

    Continue reading