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    पिण्डासन (तीन प्रकार) करने की विधि, फायदे और सावधानियां – Pindasana (Embryo Pose) in hindi.1

    पिण्डासन

    सिर, कंधा तथा गर्दन के बल किए जाने वाले आसनों में से एक जटिल योग मुद्रा हैं। और लगातार प्रयास करके ही इस योग मुद्रा पर कुशलता पाई जा सकती है। पिण्डासन के अभ्यास के लिए शारीरिक बल, संतुलन एवं बुद्धि तीनों की आवश्यकता होती है। जिससे के अभ्यासकर्ता के शरीर में शारीरिक बल, संतुलन एवं बुद्धि तीनों का विकास होता है। और लगातार प्रयास करके ही इस योग मुद्रा पर कुशलता पाई जा सकती है। नय साधको को इस आसन का अभ्यास करने की सलाह नहीं दी जाती है,  क्योंकि सही तकनीक का पालन न करने पर अभ्यासकर्ता को चोट लग सकती है। 

    इस जटिल योग प्रक्रिया से अनेक शारीरिक व मानसिक लाभ मिलते हैं। इस आसन को करने से पेट की सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। इसके अलावा कंधे, गर्दन, बाजू की मांसपेशियां भी मजबूत होती है। मानसिक रोग, बाल झड़ते, चेहरे की सुंदरता या हम कह सकते हैं कि सिर, कंधे के बल किए जाने वाले आसन कायाकल्प का काम करते हैं।

    इसलिए, इस लेख में हम पिण्डासन के बारे में जानेंगे। पिण्डासन क्या है, पिण्डासन करने का सही तरीका, पिण्डासन करने के फायदे और सावधानियों के बारे में जानकारी देंगे। 

    पिण्डासन का शाब्दिक अर्थ।

    • पिण्डासन एक संस्कृत भाषा का शब्द हैं। पिण्डासन दो शब्दों से मिलकर बना है पिंड+आसन जिसमें “पिंड” का अर्थ भ्रूण है। (गर्भस्थ शिशु की अवस्था) और “आसन” जिसका अर्थ होता है “मुद्रा”। इसे अंग्रेजी भाषा में “Embryo Pose” भी कहा जाता है।

    पिण्डासन करने का सही तरीका।

    पिण्डासन करने की विधि।

    पिण्डासन

    विधि।

    • सर्वप्रथम शीर्षासन की अवस्था में आएँ अर्थात् शीर्षासन लगाएं। 
    • अब इसी अवस्था में ऊर्ध्व पद्मासन लगाएँ।
    • अब ऊर्ध्व पद्मासन अवस्था को सामने की तरफ़ इतना झुकाएँ कि दोनों घुटने कंघों या भुजाओं को स्पर्श करने लगें। 
    • अंतिम स्थिति में आने के लिए पद्मासन अवस्था में नितम्बों को ढीला करें। 
    • दो बार श्वास खीचें और क्रमशः एक-एक करके दो बार श्वास छोड़ते हुए घुटनों को भुजाओं के पास लाएँ। 
    • 20-30 सेकंड या क्षमतानुसार इस मुद्रा में रुकें। 
    • श्वास लेते हुए मूल अवस्था में आएँ। 
    • यही क्रम पैरों की स्थिति बदलकर करें।
    • यह आसन पूरी तरह से शीर्षासन सीखा हुआ साधक ही करें। शेष वर्णन शीर्षासन जैसा ही है।

    पिण्डासन करने की अन्य प्रकार।

    शीर्षासन में पिंडासन युक्त ऊर्ध्व पद्मासन (प्रथम प्रकार)पिण्डासन
    पिंडासन (द्वितीय प्रकार)पिण्डासन
    पिंडासन (तृतीय प्रकार)पिण्डासन

    श्वास का क्रम/समय।

    • श्वास का क्रम और समय ऊपर विधि में बताया गया है।

    पिण्डासन का अभ्यास करने के लिए इस वीडियो की मदद लें।

    पिण्डासन करने के फायदे।

    पिण्डासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • उदर-क्षेत्र के अवयवों (components) को रक्तसंचार बराबर मिलता है।
    • इस आसन के अभ्यास से मेरुदंड, कूल्हे और घुटने में खिंचाव लगता हैं। जिससे इनमें लचीलापन बढ़ता है।
    • कंधे, गर्दन, बाजू की मांसपेशियां भी मजबूत होती है।
    • उदर-क्षेत्र के अवयवों (components) को रक्तसंचार बराबर मिलता है। पेट की सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
    • कब्ज की समस्या को दूर करने में एक अच्छा आसन है।
    • शीर्षासन और ऊर्ध्व पद्मासन के समस्त लाभ मिलते हैं।

    सावधानियां।

    •  सिर दर्द या रीढ़ की हड्डी में कोई परेशानी हो तो इस आसन को करने से बचें।
    •  कूल्हे, घुटने या टखनो चोट लगी हो तो पिण्डासन का अभ्यास ना करें।
    • और अधिक जानने के लिए शीर्षासन को देखें।

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    सारांश।

    योग करना अच्छी आदत है। कभी भी जल्दी फायदे पाने के चक्कर में शरीर की क्षमता से अधिक  योगाभ्यास करने की कोशिश न करें। योगासनों का अभ्यास किसी भी वर्ग विशिष्ट के लोग कर सकते हैं। 

    पिण्डासन, इस योगासन के नियमित अभ्यास से शरीर से सम्बंधित बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है। किन्तु हमारी मंत्रणा यही है कि कभी भी किसी अनुभवी योगाचार्य या योग विशेषज्ञ (yoga Expert) की मदद के बिना मुश्किल योगासनों का अभ्यास या आरंभ न करें। किसी योग शिक्षक की देखरेख में ही मुश्किल योगासनों का अभ्यास करें। इसके अलावा अगर कोई गंभीर बीमारी हो तो योगासन का आरंभ करने से पहले डॉक्टर या अनुभवी योगाचार्य की सलाह जरूर लें

     

    FAQs

     

    Ques 1. पिण्डासन करने की विधि?

    Ans. पिंडासन करने की विधि।

    • सर्वप्रथम शीर्षासन की अवस्था में आएँ अर्थात् शीर्षासन लगाएं। 
    • अब इसी अवस्था में ऊर्ध्व पद्मासन लगाएँ।
    • अब ऊर्ध्व पद्मासन अवस्था को सामने की तरफ़ इतना झुकाएँ कि दोनों घुटने कंघों या भुजाओं को स्पर्श करने लगें। 
    • अंतिम स्थिति में आने के लिए पद्मासन अवस्था में नितम्बों को ढीला करें। 
    • दो बार श्वास खीचें और क्रमशः एक-एक करके दो बार श्वास छोड़ते हुए घुटनों को भुजाओं के पास लाएँ। 
    • 20-30 सेकंड या क्षमतानुसार इस मुद्रा में रुकें। 
    • श्वास लेते हुए मूल अवस्था में आएँ। 
    • यही क्रम पैरों की स्थिति बदलकर करें।
    • यह आसन पूरी तरह से शीर्षासन सीखा हुआ साधक ही करें। शेष वर्णन शीर्षासन जैसा ही है।

     

    Ques 2. पिण्डासन करने के क्या फायदे है?

    Ans. पिंडासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • उदर-क्षेत्र के अवयवों (components) को रक्तसंचार बराबर मिलता है।
    • इस आसन के अभ्यास से मेरुदंड, कूल्हे और घुटने में खिंचाव लगता हैं। जिससे इनमें लचीलापन बढ़ता है।
    • कंधे, गर्दन, बाजू की मांसपेशियां भी मजबूत होती है।
    • उदर-क्षेत्र के अवयवों (components) को रक्तसंचार बराबर मिलता है। पेट की सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
    • कब्ज की समस्या को दूर करने में एक अच्छा आसन है।
    • शीर्षासन और ऊर्ध्व पद्मासन के समस्त लाभ मिलते हैं।

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