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    मूर्च्छा प्राणायाम :- Murcha Pranayama in Hindi.1

    मूर्च्छा प्राणायाम

    हेलो दोस्तों INDIA TODAY ONE blog में आपका स्वागत है। इस लेख में हम मूर्च्छा प्राणायाम पर चर्चा करेंगे। इस लेख में मूर्च्छा प्राणायाम के आसन को करने का तरीका और इस आसन के अभ्यास से होने वाले फायदों के बारे में बताया गया है। साथ में यह भी बताया गया है कि मूर्च्छा प्राणायाम करने के दौरान क्या सावधानी बरतें।

    मूर्च्छा प्राणायाम करने का सही तरीका।

    मूर्च्छा प्राणायाम करने की विधि।

    मूर्च्छा प्राणायाम

    विधि।

    • सर्वप्रथम पद्मासन या सिद्धासन में बैठ जाएं। 
    • अब अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। 
    • आंखें बंद करें और सिर को पीछे (लगभग 45 डिग्री का कोण पर) ले जाएं और दोनों नासिका छिद्रों से सांस लें, अंत:कुंभक करें। (चित्रानुसार)
    • अब मानसिक चिंताओं को त्यागें और सिर नीचे करते हुए रेचक करें। (चित्रानुसार)
    •  भले ही आपकी आंखें बंद हों, फिर भी भौंहों के मध्य (दोनों भौंहों के बीच) को देखने का प्रयास करें।
    •  शरीर और मन के प्रति सचेत रहें और इस अभ्यास को दोहराएँ। ऐसा कम से कम 5 बार या अनुकूलतानुसार करें।

    घेरण्ड संहिता के अनुसार।

    • सबसे पहले विधि अनुसार प्रसन्नता पूर्वक कुम्भक करके अपने मन को कामुक इच्छाओं से हटाकर भौहों के बीच स्थित आज्ञा चक्र पर अपना ध्यान केन्द्रित करें और भगवान में अपने आप को विलीन कर लें। इसे मूर्च्छा कुंभक कहते है। इस कुम्भक से सुख की प्राप्ति होती है।

    मूर्च्छा प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए इस वीडियो की मदद लें।

    मूर्च्छा प्राणायाम करने के फायदे।

    मूर्च्छा प्राणायाम का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा योगाभ्यास है। 
    • मस्तिष्क का विकास करता है तथा सभी मानसिक समस्याओं का समाधान करता है।
    • मानसिक चिंता से ग्रस्त या मस्तिष्क की निष्क्रियता की स्थिति में रहने वाले व्यक्ति को सुख की अनुभूति होती है। 
    • सिरदर्द संबंधी रोगों में लाभ मिलता है।
    •  यह योग आसन कुंडलिनी और ध्यान में सहायक।

    सावधानियां।

    • high blood pressure, heart disease, मिर्गी (epilepsy), चक्कर आना (Dizziness) तथा मस्तिष्क विकारों से संबंधित रोगियों को इस आसन का अभ्यास अनुकूलता अनुसार एवं धैर्य पूर्वक करना चाहिए।

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    सारांश।

    योग करना अच्छी आदत है। कभी भी जल्दी फायदे पाने के चक्कर में शरीर की क्षमता से अधिक  योगाभ्यास करने की कोशिश न करें। योगासनों का अभ्यास किसी भी वर्ग विशिष्ट के लोग कर सकते हैं। 

    मूर्च्छा प्राणायाम, इस योगासन के नियमित अभ्यास से शरीर से सम्बंधित बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है। किन्तु हमारी मंत्रणा यही है कि कभी भी किसी अनुभवी योगाचार्य या योग विशेषज्ञ (yoga Expert) की मदद के बिना मुश्किल योगासनों का अभ्यास या आरंभ न करें। किसी योग शिक्षक की देखरेख में ही मुश्किल योगासनों का अभ्यास करें। इसके अलावा अगर कोई गंभीर बीमारी हो तो योगासन का आरंभ करने से पहले डॉक्टर या अनुभवी योगाचार्य की सलाह जरूर लें

    FAQs

    Ques 1. मूर्च्छा प्राणायाम करने की विधि?

    Ans. मूर्च्छा प्राणायाम करने की विधि।

    • सर्वप्रथम पद्मासन या सिद्धासन में बैठ जाएं। 
    • अब अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। 
    • आंखें बंद करें और सिर को पीछे (लगभग 45 डिग्री का कोण पर) ले जाएं और दोनों नासिका छिद्रों से सांस लें, अंत:कुंभक करें। (चित्रानुसार)
    • अब मानसिक चिंताओं को त्यागें और सिर नीचे करते हुए रेचक करें। (चित्रानुसार)
    •  भले ही आपकी आंखें बंद हों, फिर भी भौंहों के मध्य (दोनों भौंहों के बीच) को देखने का प्रयास करें।
    •  शरीर और मन के प्रति सचेत रहें और इस अभ्यास को दोहराएँ। ऐसा कम से कम 5 बार या अनुकूलतानुसार करें।

     

    Ques 2. मूर्च्छा प्राणायाम करने के क्या फायदे  है?

    Ans. मूर्च्छा प्राणायाम का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा योगाभ्यास है। 
    • मस्तिष्क का विकास करता है तथा सभी मानसिक समस्याओं का समाधान करता है।
    • मानसिक चिंता से ग्रस्त या मस्तिष्क की निष्क्रियता की स्थिति में रहने वाले व्यक्ति को सुख की अनुभूति होती है। 
    • सिरदर्द संबंधी रोगों में लाभ मिलता है।
    •  यह योग आसन कुंडलिनी और ध्यान में सहायक।

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