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    विश्वामित्रासन क्या है? – visvamitrasana in hindi.1

    विश्वामित्रासन

    हेलो दोस्तों INDIA TODAY ONE blog में आपका स्वागत है। यह आसन सनातन धर्म के महान ऋषि विश्वामित्रासन को समर्पित है। इस लेख में हम विश्वामित्रासन के बारे में जानेंगे। विश्वामित्रासन क्या है, विश्वामित्रासन करने का सही तरीका, विश्वामित्रासन करने के फायदे और सावधानियों के बारे में जानकारी देंगे।

    विशेष।

    • यह आसन सनातन धर्म के महान ऋषि विश्वामित्र को समर्पित है।

    विश्वामित्रासन करने का सही तरीका।

    विश्वामित्रासन करने की विधि।

    • विश्वामित्रासन की प्रथम अवस्था।

    विश्वामित्रासन

    • विश्वामित्रासन की द्वितीय अवस्था।

    विश्वामित्रासन

    विधि।

    • सर्वप्रथम अपने आसन पर ताड़ासन में खड़े हो जाएँ। 
    • अब आगे की ओर झुकें एवं अपने दोनों हाथों की हथेलियों को ज़मीन पर रखें। 
    • अब अपने दोनों पैरों को 4 से 5 फिट पीछे ले जाएँ। 
    • अब श्वास छोड़ें और दायाँ पैर दाएँ हाथ के पास लाएँ। 
    • अब दाहिने जांघ के सामने का हिस्सा दाहिनी भुजा के ऊपर पिछले भाग पर रखें और शीघ्र ही शरीर को दायीं तरफ़ घुमाएँ। अब बायाँ हाथ बायीं जांघ पर रखें और सन्तुलन बनायें रखें।
    • अब बाएँ पैर को तिरछा करें।
    • अब बाएँ पैर के तलवे और एड़ी को ज़मीन पर दबाएँ तथा दाहिने हाथ पर वज़न देते हुए दाहिने पैर को ऊपर सामने की और सीधा करें। एवं बायाँ हाथ सीधे ऊपर की ओर कर उसकी तरफ़ देखें।(चित्रानुसार-1) कुछ योग गुरु बायाँ हाथ से दाहिने पैर का अंगुठा भी पकड़ने को कहते हैं। (चित्रानुसार-2) 
    • यह इस आसन की पुर्ण अवस्था है। 
    • अब वापस मूल अवस्था में आएँ।
    • अब यही क्रिया दूसरे पैर से भी दोहराएं।

    श्वास का क्रम/समय।

    • इस आसन के अभ्यास के दौरान पैर उठाते समय अंतःकुभक करें।
    • अंतिम स्थिति में सामान्य श्वसन करें। 
    • वापस मूल अवस्था में आते समय श्वास छोड़ें। 
    • अंतिम स्थिति में 10-15 सेकण्ड रुकें। एवं एक-एक बार दोनों तरफ़ से यही क्रिया करें।

    विश्वामित्रासन का अभ्यास करने के लिए इस वीडियो की मदद लें।

    विश्वामित्रासन करने के फायदे।

    विश्वामित्रासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • यह योगासन एकाग्रता और सन्तुलन में सामंजस्य बैठाता है। 
    • इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर का पुरा वज़न एक हाथ और एक पैर पर संतुलित रहता है। जिससे यह आसन हाथों और पैरों को सशक्त और मज़बूत बनाता है। 
    • पूरे शरीर में सुद्रढ़ता प्रदान करता है। 
    •  यह आसन उदर-क्षेत्र के अंगो को पुष्ट बनाता है। जिससे पाचन तंत्र सुचारु ढंग से कार्य करने लगता है और पाचन तंत्र (Digestive System) में सुधार होता है।

    सावधानियां।

    • अभ्यास के दौरान सन्तुलन में ध्यान दें।

    👉 यह भी पढ़ें।

    सारांश।

    योग करना अच्छी आदत है। कभी भी जल्दी फायदे पाने के चक्कर में शरीर की क्षमता से अधिक  योगाभ्यास करने की कोशिश न करें। योगासनों का अभ्यास किसी भी वर्ग विशिष्ट के लोग कर सकते हैं। 

    विश्वामित्रासन, इस योगासन के नियमित अभ्यास से शरीर से सम्बंधित बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है। किन्तु हमारी मंत्रणा यही है कि कभी भी किसी अनुभवी योगाचार्य या योग विशेषज्ञ (yoga Expert) की मदद के बिना मुश्किल योगासनों का अभ्यास या आरंभ न करें। किसी योग शिक्षक की देखरेख में ही मुश्किल योगासनों का अभ्यास करें। इसके अलावा अगर कोई गंभीर बीमारी हो तो योगासन का आरंभ करने से पहले डॉक्टर या अनुभवी योगाचार्य की सलाह जरूर लें

     

    FAQs

     

    Ques 1. विश्वामित्रासन करने की विधि?

    Ans. विश्वामित्रासन करने की विधि।

    • सर्वप्रथम अपने आसन पर ताड़ासन में खड़े हो जाएँ। 
    • अब आगे की ओर झुकें एवं अपने दोनों हाथों की हथेलियों को ज़मीन पर रखें। 
    • अब अपने दोनों पैरों को 4 से 5 फिट पीछे ले जाएँ। 
    • अब श्वास छोड़ें और दायाँ पैर दाएँ हाथ के पास लाएँ। 
    • अब दाहिने जांघ के सामने का हिस्सा दाहिनी भुजा के ऊपर पिछले भाग पर रखें और शीघ्र ही शरीर को दायीं तरफ़ घुमाएँ। अब बायाँ हाथ बायीं जांघ पर रखें और सन्तुलन बनायें रखें।
    • अब बाएँ पैर को तिरछा करें।
    • अब बाएँ पैर के तलवे और एड़ी को ज़मीन पर दबाएँ तथा दाहिने हाथ पर वज़न देते हुए दाहिने पैर को ऊपर सामने की और सीधा करें। एवं बायाँ हाथ सीधे ऊपर की ओर कर उसकी तरफ़ देखें।(चित्रानुसार-1) कुछ योग गुरु बायाँ हाथ से दाहिने पैर का अंगुठा भी पकड़ने को कहते हैं। (चित्रानुसार-2) 
    • यह इस आसन की पुर्ण अवस्था है। 
    • अब वापस मूल अवस्था में आएँ।
    • अब यही क्रिया दूसरे पैर से भी दोहराएं।

     

    Ques 2. विश्वामित्रासन करने के क्या फायदे  है?

    Ans. विश्वामित्रासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • यह योगासन एकाग्रता और सन्तुलन में सामंजस्य बैठाता है। 
    • इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर का पुरा वज़न एक हाथ और एक पैर पर संतुलित रहता है। जिससे यह आसन हाथों और पैरों को सशक्त और मज़बूत बनाता है। 
    • पूरे शरीर में सुद्रढ़ता प्रदान करता है। 
    •  यह आसन उदर-क्षेत्र के अंगो को पुष्ट बनाता है। जिससे पाचन तंत्र सुचारु ढंग से कार्य करने लगता है और पाचन तंत्र (Digestive System) में सुधार होता है।

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