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    शिव-लिंगकारासन करने की विधि, फायदे और सावधानियां – Shiv-Lingakarasana in Hindi.1

    शिव-लिंगकारासन

    हेलो दोस्तों INDIA TODAY ONE blog में आपका स्वागत है। इस लेख में हम शिव-लिंगकारासन के बारे में जानेंगे। शिव-लिंगकारासन क्या है, शिव-लिंगकारासन करने का सही तरीका, शिव-लिंगकारासन करने के फायदे और सावधानियों के बारे में जानकारी देंगे। यह संतुलन एवं उच्च अभ्यास का आसन है। इस आसन का अभ्यास किसी योग गुरु की देख रेख में और धैर्य पूर्वक करें।

    शिव-लिंगकारासन करने का सही तरीका।

    शिव-लिंगकारासन करने की विधि।

    शिव-लिंगकारासन

    विधि।

    • यह एक उच्च अभ्यास वाला आसन है। इस आसन को करने के लिए धैर्य और बहुत अधिक अभ्यास की आवश्यकता होती है। और इस आसन का अभ्यास किसी योग गुरु की देख रेख में एवं धैर्य पूर्वक करें।
    • वृश्चिक आसन के अभ्यास में पुर्णत: का सक्षम होने के बाद धीरे-धीरे नितम्बों को पीठ से लगाते हैं एवं जंघाओं को सिर से लगाते हैं। (चित्रानुसार)
    • इस प्रकार सिर से कमर तक का भाग नितम्ब, जंघा एवं पैर के समानान्तर हो जाता है और इस स्थिति में नितम्ब, जंघा एवं पैर भी ज़मीन के सामानान्तर हो जाते हैं।
    • इस आसन के अभ्यास के दौरान पैरों के पंजे सिर से आगे हो जाते हैं। (चित्रानुसार)

    शिव-लिंगकारासन का अभ्यास करने के लिए इस वीडियो की मदद लें।

    शिव-लिंगकारासन करने के फायदे।

    शिव-लिंगकारासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • यह आसन उदर क्षेत्र, फेफड़े, मेरुदण्ड, जंघा, पीठ, कमर आदि सभी में रक्त संचार (blood circulation) को सुचारु बनाता है।
    • इस आसन में पुर्णत: का सक्षम होने के बाद लगभग सभी प्रकार के आसन आसानी से किए जा सकते हैं।
    • शरीर के क्रमशः रोग निवारण में पूर्णतः समर्थ।
    • शरीर में लचीलापन एवं नई ऊर्जा का प्रादुर्भाव होता है।
    • यह आसन किसी भी प्रकार के कंपवात (Parkinson’s) का अचूक इलाज़ ।
    • आध्यात्मिक उत्थान में सहायक।

    सावधानियां।

    • इस आसन में पूर्णतः सक्षम होने के लिए बहुत अधिक अभ्यास की आवश्यकता है, अतः योग शिक्षक की देख-रेख में ही इस आसन का अभ्यास करें। योग शिक्षक की देख-रेख के बिना इस आसन का अभ्यास न करें।
    • इस आसन में पूर्णतः सक्षम होना यह कई महीनों के अभ्यास से ही संभव है।
    • high blood pressure, चक्कर आना, heart disease एवं सख़्त शरीर वाले इस आसन का अभ्यास न करें।

    शिव-लिंगकारासन करने के बाद ये आसन करें:-

    पश्चिमोत्तानासनपश्चिमोत्तानासन
    पाद हस्तासनहस्त पादासन

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    सारांश।

    योग करना अच्छी आदत है। कभी भी जल्दी फायदे पाने के चक्कर में शरीर की क्षमता से अधिक  योगाभ्यास करने की कोशिश न करें। योगासनों का अभ्यास किसी भी वर्ग विशिष्ट के लोग कर सकते हैं। 

    शिव-लिंगकारासन, इस योगासन के नियमित अभ्यास से शरीर से सम्बंधित बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है। किन्तु हमारी मंत्रणा यही है कि कभी भी किसी अनुभवी योगाचार्य या योग विशेषज्ञ (yoga Expert) की मदद के बिना मुश्किल योगासनों का अभ्यास या आरंभ न करें। किसी योग शिक्षक की देखरेख में ही मुश्किल योगासनों का अभ्यास करें। इसके अलावा अगर कोई गंभीर बीमारी हो तो योगासन का आरंभ करने से पहले डॉक्टर या अनुभवी योगाचार्य की सलाह जरूर लें

    FAQs

    Ques 1. शिव-लिंगकारासन करने की विधि?

    Ans. शिव-लिंगकारासन करने की विधि।

    • यह एक उच्च अभ्यास वाला आसन है। इस आसन को करने के लिए धैर्य और बहुत अधिक अभ्यास की आवश्यकता होती है। और इस आसन का अभ्यास किसी योग गुरु की देख रेख में एवं धैर्य पूर्वक करें।
    • वृश्चिक आसन के अभ्यास में पुर्णत: का सक्षम होने के बाद धीरे-धीरे नितम्बों को पीठ से लगाते हैं एवं जंघाओं को सिर से लगाते हैं। (चित्रानुसार)
    • इस प्रकार सिर से कमर तक का भाग नितम्ब, जंघा एवं पैर के समानान्तर हो जाता है और इस स्थिति में नितम्ब, जंघा एवं पैर भी ज़मीन के सामानान्तर हो जाते हैं।
    • इस आसन के अभ्यास के दौरान पैरों के पंजे सिर से आगे हो जाते हैं। (चित्रानुसार)

    Ques 2. शिव-लिंगकारासन करने के क्या फायदे  है?

    Ans. शिव-लिंगकारासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • यह आसन उदर क्षेत्र, फेफड़े, मेरुदण्ड, जंघा, पीठ, कमर आदि सभी में रक्त संचार (blood circulation) को सुचारु बनाता है।
    • इस आसन में पुर्णत: का सक्षम होने के बाद लगभग सभी प्रकार के आसन आसानी से किए जा सकते हैं।
    • शरीर के क्रमशः रोग निवारण में पूर्णतः समर्थ।
    • शरीर में लचीलापन एवं नई ऊर्जा का प्रादुर्भाव होता है।
    • यह आसन किसी भी प्रकार के कंपवात (Parkinson’s) का अचूक इलाज़ ।
    • आध्यात्मिक उत्थान में सहायक।

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