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    हंसासन करने की विधि, फायदे और सावधानियां – Hansasana in Hindi.1

    हंसासन

    हेलो दोस्तों INDIA TODAY ONE blog में आपका स्वागत है। इस लेख में हम हंसासन के बारे में जानेंगे। हंसासन क्या है, हंसासन करने का सही तरीका, हंसासन करने के फायदे और सावधानियों के बारे में जानकारी देंगे।

    यह आसान उदर-क्षेत्र के विकार दूर होते हैं। एवं पाचन तंत्र (Digestive System) में सुधार होता है। एवं पाचन तंत्र (Digestive System) सक्रिय हो जाता है। तथा आमाशय, अग्नाश्य, छोटी आंत, बड़ी आंत, किडनी, लीवर आदि अंगो को प्रभावित कर उनसे होने वाले रोगों से बचाता है। जीवन में भी सन्तुलन पैदा करता है।और जीवन उत्साह और स्फूर्ति से भर जाता है।

    हंसासन का शाब्दिक अर्थ।

    • हंसासन एक संस्कृत भाषा का शब्द हैं। हंसासन दो शब्दों से मिलकर बना है। हंस +आसन जिसमें हंस का अर्थ “हंस” है। और आसन का अर्थ होता है मुद्रा।

    हंसासन करने का सही तरीका।

    हंसासन करने की विधि।

    हंसासन

    विधि।

    • सर्वप्रथम अपने आसन पर घुटनों के बल बैठें जाए।
    • अब अंगुलियाँ सामने की तरफ़ करते हुए दोनों हाथों की  हथेलियाँ ज़मीन पर रखें। (चित्रानुसार)
    • अब आगे झुकें और कुहनियों पर पेट को तथा भुजाओं पर सीना स्थापित करें। (चित्रानुसार)
    • एक-एक करके अपने दोनों पैरों को पीछे करें।
    • अब कुहनियों तथा भुजाओं पर शरीर का पूरा भार देते हुए तथा पैरों को ज़मीन से उठाते हुए दोनों हाथों के पंजों शारीरिक सन्तुलन बनाएँ। (चित्रानुसार) –
    • अपनी क्षमता अनुसार जितनी देर रुक सकते हैं रुकें। तत्पश्चात् पैरो को ज़मीन पर रखकर वापस मूल अवस्था में आ जाएँ।
    • कुछ अनुभवी योगाचार्य एव योग विशेषज्ञ इस आसन का अभ्यास दोनों पैरो पंजों को ज़मीन पर ही स्पर्शित करते हुए कराते हैं। अर्थात् हंसासन में पैरों के अंगूठे को ज़मीन से ऊपर नहीं उठाने देते एवं हाथों की अंगुलियों को पैरों की तरफ़ करवाकर भी करवाते हैं।

    श्वास का क्रम/समय।

    • आसन बनाते समय श्वास बाहर ही रोककर रखें।
    • पूर्ण आसान की स्थिति में अपनी क्षमता अनुसार रुकें एवं 3 बार दोहराएँ।
    • पूर्ण आसान की स्थिति में रुके होने के दोरान धीरे-धीरे श्वसन क्रिया करें।
    • वापस मूल अवस्था में आते समय बाहर ही श्वास रोककर रखें।

    हंसासन का अभ्यास करने के लिए इस वीडियो की मदद लें।

    हंसासन करने के फायदे।

    हंसासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • उदर-क्षेत्र के विकार दूर होते हैं। एवं पाचन तंत्र (Digestive System) में सुधार होता है। एवं पाचन तंत्र (Digestive System) सक्रिय हो जाता है।
    • पाचन तंत्र के सभी अंगो को प्रभावित करता है। कब्ज़, दूषित वायु ठीक करता हैं।
    • आमाशय, अग्नाश्य, छोटी आंत, बड़ी आंत, किडनी, लीवर आदि अंगो को प्रभावित कर उनसे होने वाले रोगों से बचाता है।
    • रक्त संचार (blood circulation) तेज करता है।
    • यह आसन ओज, तेज और चेहरे की चमक बढ़ाता है। और चेहरे की झुर्रियों को समाप्त कर देता है।
    • जीवन में भी सन्तुलन पैदा करता है।और जीवन उत्साह और स्फूर्ति से भर जाता है।

    सावधानियां।

    • कमज़ोर कलाई वाले इस आसन का अभ्यास धीरे-धीरे करे।
    • अति उच्चरक्तचाप, अल्सर, हर्निया वाले रोगी इस आसन का अभ्यास न करें।
    • गर्भवती महिलाएँ इस आसन का अभ्यास बिल्कुल भी न करें।

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    सारांश।

    योग करना अच्छी आदत है। कभी भी जल्दी फायदे पाने के चक्कर में शरीर की क्षमता से अधिक योगाभ्यास करने की कोशिश न करें। योगासनों का अभ्यास किसी भी वर्ग विशिष्ट के लोग कर सकते हैं।

    हंसासन, इस योगासन के नियमित अभ्यास से शरीर से सम्बंधित बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है। किन्तु हमारी मंत्रणा यही है कि कभी भी किसी अनुभवी योगाचार्य या योग विशेषज्ञ (yoga Expert) की मदद के बिना मुश्किल योगासनों का अभ्यास या आरंभ न करें। किसी योग शिक्षक की देखरेख में ही मुश्किल योगासनों का अभ्यास करें। इसके अलावा अगर कोई गंभीर बीमारी हो तो योगासन का आरंभ करने से पहले डॉक्टर या अनुभवी योगाचार्य की सलाह जरूर लें

    FAQs

    Ques 1. हंसासन करने की विधि?

    Ans. हंसासन करने की विधि।

    • सर्वप्रथम अपने आसन पर घुटनों के बल बैठें जाए।
    • अब अंगुलियाँ सामने की तरफ़ करते हुए दोनों हाथों की  हथेलियाँ ज़मीन पर रखें। (चित्रानुसार)
    • अब आगे झुकें और कुहनियों पर पेट को तथा भुजाओं पर सीना स्थापित करें। (चित्रानुसार)
    • एक-एक करके अपने दोनों पैरों को पीछे करें।
    • अब कुहनियों तथा भुजाओं पर शरीर का पूरा भार देते हुए तथा पैरों को ज़मीन से उठाते हुए दोनों हाथों के पंजों शारीरिक सन्तुलन बनाएँ। (चित्रानुसार) –
    • अपनी क्षमता अनुसार जितनी देर रुक सकते हैं रुकें। तत्पश्चात् पैरो को ज़मीन पर रखकर वापस मूल अवस्था में आ जाएँ।
    • कुछ अनुभवी योगाचार्य एव योग विशेषज्ञ इस आसन का अभ्यास दोनों पैरो पंजों को ज़मीन पर ही स्पर्शित करते हुए कराते हैं। अर्थात् हंसासन में पैरों के अंगूठे को ज़मीन से ऊपर नहीं उठाने देते एवं हाथों की अंगुलियों को पैरों की तरफ़ करवाकर भी करवाते हैं।

    Ques 2. हंसासन करने के क्या फायदे है?

    Ans. हंसासन का नियमित अभ्यास करने के फायदे।

    • उदर-क्षेत्र के विकार दूर होते हैं। एवं पाचन तंत्र (Digestive System) में सुधार होता है। एवं पाचन तंत्र (Digestive System) सक्रिय हो जाता है।
    • पाचन तंत्र के सभी अंगो को प्रभावित करता है। कब्ज़, दूषित वायु ठीक करता हैं।
    • आमाशय, अग्नाश्य, छोटी आंत, बड़ी आंत, किडनी, लीवर आदि अंगो को प्रभावित कर उनसे होने वाले रोगों से बचाता है।
    • रक्त संचार (blood circulation) तेज करता है।
    • यह आसन ओज, तेज और चेहरे की चमक बढ़ाता है। और चेहरे की झुर्रियों को समाप्त कर देता है।
    • जीवन में भी सन्तुलन पैदा करता है।और जीवन उत्साह और स्फूर्ति से भर जाता है।

     

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